BJP MLA Basangouda Patil Yatnal: बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने कर्नाटक सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सब सिर्फ मुसलमानों को खुश करने के लिए कर रहे हैं, जबकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
Karnataka Hijab Row: कर्नाटक में एक बार फिर से हिजाब को लेकर घमासान शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने सिद्धारमैया सरकार पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने रविवार को कर्नाटक सरकार पर हिजाब और भगवा शॉल के मुद्दे पर उसके रुख को लेकर तीखा हमला किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम तुष्टीकरण के समान है। बीजेपी विधायक ने चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान की गई कोई भी कार्रवाई अदालत की अवमानना के बराबर हो सकती है।
यतनाल मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का जिक्र करते हुए कहा कि मामला फिलहाल अदालत में है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक ऐसा कोई भी कदम उठाना अदालत की अवमानना हो सकता है। सिद्धारमैया यह सब सिर्फ मुसलमानों को खुश करने के लिए कर रहे हैं, जबकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि ऐसे निर्णय लिए जाते हैं, तो हिंदू छात्रों को भी भगवा शॉल पहनने और तिलक लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
बीजेपी विधायक ने कहा कि अगर हिजाब के मुद्दे पर उनकी यही सोच है, तो हम भी हिंदू छात्रों से भगवा शॉल पहनने और तिलक लगाने का आग्रह करेंगे। हम देखेंगे कि क्या कार्रवाई की जाती है। हम भी अब तैयार हैं।
राज्य सरकार को निशाना बनाते हुए यतनाल ने कहा कि हिजाब की अनुमति देते हुए भगवा शॉल पर प्रतिबंध लगाना तुष्टीकरण की राजनीति है। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल खुलने पर वे भगवा शॉल वितरित करेंगे।
इस मुद्दे पर सरकार के अधिकार पर सवाल उठाते हुए भाजपा विधायक ने पूछा कि भगवा शॉल पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार उन्हें किसने दिया है? भगवा शॉल पहनना हमारा अधिकार है। यह हमारा धर्म है। मैं सभी अभिभावकों से अपील करता हूं कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय तिलक लगाएं और उन्हें भगवा शॉल पहनाएं।
आपको बता दें कि यह टिप्पणी कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा 14 मई को राज्य सरकार के उस निर्णय को स्पष्ट करने के बाद आई है जिसमें उन्होंने 5 फरवरी, 2022 के उस आदेश को वापस ले लिया था जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक पोशाक पर प्रतिबंध लगाया गया था। उन्होंने कहा कि संशोधित दिशानिर्देश न केवल हिजाब बल्कि अन्य पारंपरिक रूप से पहने जाने वाले धार्मिक प्रतीकों जैसे कि जनेऊ (जनेऊ), रुद्राक्ष और शिव माला की भी अनुमति देते हैं।