कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने पर रोक को चुनौती देने वाली 23 याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में आज के लिए सूचीबद्ध किया गया था। इस मामले में हाई कोर्ट पहले ही हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा चुका है, जिस फैसले को अलग-अलग 23 याचिकाओं के जरिए शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई। मामले में अगली सुनवाई 5 सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने हिजाब प्रतिबंध को बरकरार रखते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया। इस मामले में अब अगली सुनवाई 5 सितंबर को होगी। देश की शीर्ष अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को बरकरार रखने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि, वह स्थगन की मांग वाली याचिका को स्वीकार नहीं करेगा। सुनवाई के दौरान जज हेमंत गुप्ता ने याचिकाकर्ताओं की जमकर खिंचाई की। उन्होंने कहा कि, "आप तत्काल सुनवाई चाहते थे और जब मामला सूचीबद्ध होता है, तो आप स्थगन की मांग करते हैं। हम मंच खरीदारी की अनुमति नहीं देंगे।"
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले में अब अगली सुनवाई अगले सोमवार यानी 5 सिंतबर को होगी।
इन प्रतिबंध के खिलाफ कुल 23 याचिकाओं को कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। वहीं, 25 मामले जस्टिस हेमंत गुप्ता और सुधांशु धूलिया की खंडपीठ के समक्ष लगाए गए हैं जिन पर सुनवाई सुनवाई होना है।
सुप्रीम कोर्ट में जिन याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। वो राज्य सरकार और हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं हैं। दरअसल कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें उसने राज्य सरकार के आदेश को बरकरार रखा था।
यह भी पढ़ें - PM Modi Security Lapse: सुप्रीम कोर्ट ने पढ़ी इंदु मल्होत्रा की रिपोर्ट, कहा- एसएसपी ने ठीक से नहीं निभाई ड्यूटी
राज्य सरकार के फैसले के मुताबिक, स्कूलों और कालेजों में सभी छात्राओं के हिजाब पहनने पर प्रतिबंध रहेगा और वर्दी नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा।
हिजाब विवाद इस साल उस समय भड़क उठा जब वर्ष की शुरुआती महीने जनवरी में कर्नाटक के उडुपी जिले के सरकारी पीयू कालेज में कथित तौर पर हिजाब पहनने वाली छह लड़कियों को अंदर आने से रोका गया।
कॉलेज में एंट्री पर रोक से गुस्साई छात्राओं ने परिसर के बाहर ही धरना शुरू कर दिया। इसके बाद उडुपी के कई कालेजों के हिंदू लड़के भगवा स्कार्फ पहनकर क्लास अटेंड करने लगे।
धीरे-धीरे इस मामले में राजनीतिक रूप ले लिया और सियासी जुबानी जंग शुरू हो गई। वहीं ये विरोध प्रदेश के अन्य जिलों और इलाकों में भी शुरू हो गया।
यह भी पढ़ें - Freebies Issue: चुनाव में मुफ्त घोषणाओं के मामले पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, मामला 3 जजों की बेंच को भेजा