
TMC के 20 सांसदों ने NCPI में किया विलय (Photo-IANS)
Who is NCPI Founder: ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद के विलय करने के बाद अचानक नेशनल सिटीजन पार्टी (NCPI) चर्चाओं में आ गई है। रविवार को बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और एक पत्र सौंपा, जिसमें सदन में अलग से बैठने की व्यवस्था की मांग की। वहीं NCPI के चर्चाओं में आने के बाद इसको कौन चलाता है, इसको लेकर भी सवाल उठने लग गए हैं।
NCPI की अध्यक्ष शिउली कुंडू है। वहीं चुनावी पोस्टर में उत्तिया कुंडू को उपाध्यक्ष और शांतनु डे को संगठन सचिव है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर उत्तिया ने बंगाल के सीएम शुभेन्दु अधिकारी के साथ एक फोटो शेयर की है, यह फोटो 10 मई को पोस्ट की गई थी।
फेसबुक प्रोफाइल में उत्तिया कुंडू ने खुद को मोटिवेशनल स्पीकर, गणित का शिक्षक आईएसओ ऑडिटर तथा ‘जागो विश्व’ नामक एक साप्ताहिक बंगाली समाचार-पत्र के सचिव हैं। वहीं शिउली कुंडू अपने को उसी प्रकाशन की उप-संपादक (Sub-editor) बताती हैं।
बता दें कि NCPI एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है। 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से पहले यह पार्टी बनाई गई थी। पार्टी ने महज दो सीटों पर चुनाव लड़ा और 822 वोट मिले। चुनाव रिकॉर्ड के मुताबिक पार्टी को केवल 1.13 लाख रुपये का चंदा मिला।
वहीं NCPI का पंजीकृत पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर में है। शिउली कुंडू के पति उत्तिया कुंडू हैं। दरअसल, त्रिपुरा में पार्टी का कामकाज शांतनु डे देख रहे हैं। हालांकि 2023 में विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद पार्टी ने लोकसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था।
स्पीकर से मिलने के बाद बागी सांसदों की नेता काकोली घोष ने कहा कि हम 20 सांसदों ने स्पीकर से अलग बैठने की अनुमति मांगी है। हम TMC के लोकसभा सांसदों की कुल संख्या (28) के दो-तिहाई से अधिक हैं। हम नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी में विलय कर रहे हैं और आगे प्रधानमंत्री के नेतृत्व में NDA के साथ काम करेंगे। काकोली घोष बागी सांसदों का नेतृत्व कर रही हैं।
दूसरी ओर, TMC ने इस कदम को अवैध बताया। पार्टी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के खिलाफ है। अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को लिखे पत्र में अनुरोध किया कि TMC को लोकसभा में एकीकृत पार्टी माना जाए और किसी भी अलग गुट को मान्यता न दी जाए।
दरअसल, दल-बदल कानून के अनुसार, यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक या सांसद किसी दूसरी पार्टी में विलय का समर्थन करते हैं, तो उन पर अयोग्यता लागू नहीं होती।
Updated on:
15 Jun 2026 11:29 am
Published on:
15 Jun 2026 11:12 am
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