
Karnataka MLC Election Cross Voting: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के प्रभाव में बीजेपी के साथ खेला गया है। एमएफसी चुनाव के दौरान कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की गई। क्रॉस-वोटिंग की कथित तौर पर लगभग 6-7 वोट कांग्रेस के पास चले गए। इस पर प्रदेश भाजपा ने तीन सदस्यीय वाली एक जांच समिति का गठन किया है और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए बैठकें करने की योजना बनाई है। पार्टी विरोधी तथ्य इकट्ठा करने और बागियों की पहचान करने के लिए मोससी सी.टी. रवि, राज्य उपाध्यक्ष एन. महेश और सहयोगियों महेश तेनगिनाई की एक जांच समिति बनाई गई है। यह कमेटी इस केस उच्च स्तरीय समीक्षा कर रही है।
ऐसी जानकारी मिली है कि एमएलसी चुनाव में क्रॉस वोटिंग के जरिए पार्टी को धोखा देने वाले विधायकों के खिलाफ कर्नाटक भाजपा सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी। पार्टी ने बागी विधायकों की पहचान के लिए एक जांच समिति बनाई है और उनके दिल्ली स्थित आलाकमान ने तलब भी किया है।पहले ऐसे मामलों में पार्टी ने बागी विधायकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने से लेकर प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करने तक के कदम उठाए हैं। पूर्व में क्रॉस वोटिंग साबित होने पर पार्टी व्हिप के उल्लंघन के तहत विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की जाती रही है और ऐसे नेताओं को भविष्य के चुनावों में टिकट न देने जैसे कड़े फैसले लिए गए हैं।
मामले के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य अध्यक्ष है। पार्टी आलाकमान ने कहा है कि 'माफी का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है,' और पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। इधर पता चला है कि एक अनोखे कदम के तहत, राज्य बीजेपी नेतृत्व धर्मस्थल मंदिर में एक बैठक करने की योजना बना रहा है, जिसमें विधायकों से मुख्य देवता के सामने अपनी निष्ठा की शपथ लेने के लिए कहा जाएगा, ताकि दलबदलुओं का पर्दाफाश हो सके।
कर्नाटक में क्रॉस-वोटिंग और दलबदल के गंभीर राजनीतिक और कानूनी परिणाम सामने आए हैं, हालांकि राजनीतिक जोड़-तोड़ अक्सर लंबे समय का असर कम कर देती है। गौरतलब है कि सन 2019 में एक ऐतिहासिक मिसाल ने राज्य की राजनीति को बदल दिया, तब क्रॉस-वोटिंग करने वाले कांग्रेस और जद(एस) के 17 बागी विधायकों ने इस्तीफा देकर गठबंधन सरकार गिरा दी थी और तत्कालीन स्पीकर ने विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्यता को बरकरार रखा, लेकिन उन्हें फिर से चुनाव लड़ने की अनुमति दी
अब अगर आंतरिक जांच के माध्यम से किसी विधायक की क्रॉस-वोटिंग में संलिप्तता निश्चित रूप से साबित हो जाती है, तो पार्टी आमतौर पर कारण बताओ नोटिस जारी करती है और सदस्य को निलंबित करने या पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से स्थायी रूप से निष्कासित करने की कार्रवाई कर सकती है। हालांकि क्रॉस-वोटिंग पार्टी व्हिप का उल्लंघन है, लेकिन दलबदल विरोधी कानून को कानूनी रूप से लागू करने के लिए पार्टी को स्पीकर से विधायकों की विधायी सीटें छीनने के लिए कहना पड़ सकता है, जिसके लिए वोटिंग व्यवहार के ठोस और अकाट्य सुबूत की जरूरत होती है।
उल्लेखनीय है कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की अप्रत्याशित हार से कई सवाल पैदा हो गए।
इसने इंडिया ब्लॉक के अंदर आरोप-प्रत्यारोप का एक खेल शुरू हो गया है, इस मामले में कांग्रेस ने सहयोगियों पर क्रॉस-वोटिंग का आरोप लगाया था, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और सीपीआई (एमएल)-लिबरेशन दोनों ने इस आरोप को खारिज कर दिया था।
गौरतलब है कि झारखंड की राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को मतदान हुआ था और 81 सदस्यीय विधानसभा में इंडिया ब्लॉक को संख्यात्मक बढ़त हासिल थी, लेकिन नतीजों के रूप में अप्रत्याशित परिणाम नजर आए । झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने 30 वोटों के साथ एक सीट जीत ली, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने 28 वोट हासिल कर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हरा दिया, जिन्हें महज 20 वोट मिले। झा के पक्ष में डाले गए एक वोट को अमान्य घोषित कर दिया गया
झारखंड कागजों में इंडिया ब्लॉक के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त ताकत थी। इस गठबंधन में जम्मू-कश्मीर परिषद के 34 विधायक, कांग्रेस के 16 विधायक, आरजेडी के चार विधायक और सीपीआई (एमएल)-एलएम के दो विधायक शामिल थे, जिससे कुल मिलाकर 56 सदस्य हो गए। कांग्रेस को उम्मीद थी कि झा को आवश्यक कोटा 28 वोट मिल जाएंगे। इस तरह झारखंड में खेल हो गया।
बहरहाल,अहम बात यह है कि भाजपा अब तक उन राज्यों में क्षेत्रीय दलों टीएमसी, शिव सेना और आप आदि की ताकत कमजोर करने और उनमें बिखराव लाने में सफल रही है, लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के प्रभाव के कारण उसे यहां जोर का झटका लगा है। अब देखना यह है कि भाजपा इस संकट से कैसे उबरती है और दगा देने वाले नेताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। यह भी देखना है कि प्रधानमंत्री और भाजपा आलाकमान नितिन नवीन दोषी नेताओं को क्या सजा देते हैं।