राष्ट्रीय

कर्नाटक में रद्दी बेचकर 480 बच्चों की पढ़ाई में मदद, 9 साल में जुटाए 50 लाख रुपये

कर्नाटक के बेलगावी में शांताई विद्या आधार योजना के तहत पुराने अखबार और किताबें बेचकर 9 साल में 50 लाख रुपये जुटाए गए। इससे करीब 480 विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली।
2 min read
• •
Updated: 28 Oct 2026, 3:00 AM IST
karnataka news
कर्नाटक में रद्दी बेचकर 480 बच्चों की पढ़ाई में मदद

Shantai Vidya Aadhar Yojana: घर के किसी कोने में पड़े पुराने अखबार, अलमारी में धूल खाती किताबें, स्कूलों के पुराने प्रश्नपत्र और कार्यालयों के अनुपयोगी कागज को आमतौर पर लोग रद्दी समझकर बेच देते हैं। लेकिन कर्नाटक के बेलगावी में इन्हीं बेकार वस्तुओं ने सैकड़ों गरीब बच्चों के सपनों को संवारने में बड़ा योगदान दिया है। बामनवाड़ी स्थित शांताई वृद्धाश्रम की अनूठी पहल से वर्ष 2017 में शुरू हुई ‘शांताई विद्या आधार’ योजना के तहत पुराने अखबारों, पुस्तकों, पत्रिकाओं, प्रश्नपत्रों और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को एकत्र कर बेचा जाता है। इससे मिलने वाली राशि जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा पर खर्च की जाती है। पिछले 9 वर्षों में इस पहल से 50 लाख रुपए से अधिक की राशि जुटाई गई और लगभग 480 विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिली है।

बेटियां बनीं दूसरों की उम्मीद


पहल की सबसे भावुक कहानी देवकी किलारी के परिवार की है। पति के निधन के बाद देवकी पर अपनी दो छोटी बेटियों को अकेले पालने और पढ़ाने की जिम्मेदारी आ गई। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने दोनों बेटियों को दसवीं कक्षा तक पढ़ाया। लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। परिवार के सामने बेटियों की शिक्षा रोकने की नौबत आ गई। कठिन समय में 'शांताई विद्या आधार' योजना से आर्थिक मदद मिली। दोनों बेटियों ने आगे की पढ़ाई पूरी की और आज दोनों प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी कर रही हैं और उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो चुका है।

एक छात्रा की जरूरत से जन्मा बड़ा अभियान

अभियान के पीछे शांताई वृद्धाश्रम के कार्यकारी अध्यक्ष विजय मोरे की संवेदनशील सोच है। पहले वर्ष अभियान से करीब दो लाख रुपए जुटे। धीरे-धीरे लोगों, स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों ने इसमें भागीदारी शुरू की। भारतेश शिक्षा संस्था, कर्नाटक लॉ सोसाइटी और मराठा मंडल जैसी संस्थाओं ने भी अनुपयोगी सामग्री दान की। भारतेश शिक्षा संस्था ने लगभग पांच टन रद्दी उपलब्ध कराई। योजना के अंतर्गत जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों की फीस पूरी या आंशिक रूप से भरी जाती है। कई बच्चों को पांच हजार से 25 हजार रुपए तक की सहायता दी जा रही है। इसके अतिरिक्त, बेलगावी के दो निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की फीस और अध्ययन सामग्री के लिए भी इस राशि का उपयोग किया जाता है।

Published on: