
Gyanesh Kumar Protest: केरल में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सियासी हलचल अब सड़क तक पहुंचने वाली है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर 25 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में बड़ा विरोध मार्च निकालने का ऐलान किया है। पार्टी के मुताबिक यह प्रदर्शन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रव्यापी आह्वान का हिस्सा होगा। मार्च में मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष समेत कई मंत्री, सांसद और विधायक शामिल होंगे।
केरल में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने अपना विरोध तेज करने का फैसला किया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) 25 सितंबर को तिरुवनंतपुरम में लोक भवन तक विरोध मार्च निकालेगी। पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मार्च शाम 4 बजे शुरू होगा। इसका मकसद CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे कांग्रेस के अभियान से जोड़ना है।
KPCC के संगठन महासचिव नेय्याट्टिनकरा सनल ने बताया कि यह कार्यक्रम AICC के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शन में मुख्यमंत्री, KPCC अध्यक्ष, राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और पार्टी के विभिन्न प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है।
कांग्रेस का यह कदम ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विवाद तेज है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनावी सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया कि आयोग के भीतर अलग-अलग राय या सुझाव आना संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा है। आयोग के अनुसार, अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और SIR समेत उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप जारी किए गए हैं।
इसी विवाद की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने केरल में अपने आंदोलन का विस्तार करने की रणनीति बनाई है। पार्टी के कार्यक्रम के मुताबिक 26 सितंबर को राज्य के विभिन्न जिलों में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। यानी तिरुवनंतपुरम का मार्च केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं रहेगा, बल्कि अगले दिन इसका असर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई देने की तैयारी है।
मामले ने इसलिए भी राजनीतिक महत्व हासिल किया है क्योंकि SIR के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग प्रक्रिया को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी और निर्धारित नियमों के तहत संचालित किए जाने की बात कह रहा है।