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कोर्ट ने एक्टर दिलीप को किया यौन उत्पीड़न केस में बरी तो एक्ट्रेस का छलका दर्द, ‘कोर्ट से उठ गया भरोसा…’

केरल कोर्ट ने यौन उत्पीड़न से जुड़े केस में एक्टर दिलीप को बरी कर दिया है। इसके बाद पीड़िता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा। कहा- कोर्ट से भरोसा उठ गया...

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Dec 15, 2025
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

केरल के चर्चित एक्ट्रेस अपहरण और यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है। कोर्ट ने इस मामले में अभिनेता दिलीप को सभी आरोपों से बरी कर दिया है, जबकि 6 अन्य आरोपियों को सजा सुनाई है। कोर्ट के फैसले के बाद पीड़िता ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है। पीड़िता ने कहा कि कोर्ट से भरोसा उठ गया। देश में हर नागरिक को कानून के सामने समान रूप से नहीं देखा जाता है।

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8 साल पुराना है यह मामला

दरअसल, अपहरण और यौन उत्पीड़न से जुड़ा यह मामला 8 साल पुराना है। साल 2017 में केरल की मलयालम सिनेमा की एक्ट्रेस ने दिलीप और अन्य लोगों पर आरोप लगाया था। आठ साल नौ महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 8 दिसंबर 2025 को एर्नाकुलम की अदालत ने अभिनेता दिलीप को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जबकि इस मामले में छह अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़ित पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि इस कांड में एक्टर दिलीप की कोई संलिप्तता थी।

लगभग 9 साल बाद दर्दनाक संघर्ष का अंत

कोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस ने लिखा कि लगभग 9 साल बाद इस दर्दनाक संघर्ष का अंत हुआ। 6 आरोपियों को सजा मिली। उन्होंने कहा कि यह पल उन लोगों को समर्पित है, जिन्होंने उनके दर्द को झूठ और केस को मनगढ़ंत कहानी बताया।

एक्टर दिलीप के छूटने पर क्या बोलीं पीड़िता

पीड़िता ने अपने पोस्ट में उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि मुख्य आरोपी उनका निजी ड्राइवर था। पीड़िता ने लिखा कि मुख्य आरोपी न तो उनका ड्राइवर था, न कर्मचारी और न ही कोई करीबी व्यक्ति, बल्कि एक ऐसा शख्स था जिससे उनकी मुलाकात केवल एक-दो बार फिल्म के सिलसिले में हुई थी।

एक्टर दिलीप के बरी होने पर पीड़िता ने लिखा कि साल 2020 से ही उन्हें महसूस होने लगा था कि मामले की सुनवाई में कुछ ठीक नहीं चल रहा। उन्होंने कहा कि कई बार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया। साथ ही, ट्रायल कोर्ट में मामले की सुनवाई कर रहे जज को हटाने की मांग की, लेकिन अपील खारिज कर दी गई।

पीड़िता ने लिखा- 'मेरे मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं की गई। केस से जुड़े अहम सबूत को अवैध रूप से एक्सेस किया गया। दो सरकारी वकीलों ने भी यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि अदालत का माहौल अभियोजन के प्रति शत्रुतापूर्ण हो गया है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की। खुली अदालत में सुनवाई की मांग की, लेकिन सभी अनुरोध को ठुकरा दिया गया।'

Published on:
15 Dec 2025 07:38 am
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