शशि थरूर ने तमिलनाडु के नतीजों पर भी बात की। उन्होंने एक्टर विजय की पार्टी TVK को खास तौर पर सराहा। उन्होंने कहा कि यह पार्टी पहली बार अकेले चुनाव लड़ते हुए बहुमत के करीब पहुंच गई।
केरल में कांग्रेस की प्रचंड जीत पर शशि थरूर बोले- '10 साल बाद सत्ता बदली', BJP पर कसा तंज, विजय की पार्टी को लेकर क्याकहा
केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने सियासी हलचल मचा दी है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस जीत को बड़ी राहत और नई उम्मीद बताया है।
उन्होंने साफ कहा कि जनता ने 10 साल की बदइंतजामी को सिरे से नकार दिया है और यूडीएफ को साफ तौर पर बदलाव का मैंडेट दिया है।
शशि थरूर ने कहा कि भाजपा को महज तीन सीटें मिली हैं। उनका कहना है कि इन सीटों का सरकार चलाने पर लगभग कोई असर नहीं पड़ेगा। यूडीएफ अब पूरी आत्मविश्वास के साथ काम करेगी क्योंकि केरल की जनता यही चाहती है कि असली बदलाव हो।
थरूर ने एक दिलचस्प बात कही कि इस चुनाव में दोनों तरफ जीत का माहौल है। दिल्ली में BJP बंगाल और असम की जीत से उत्साहित है। वहीं कांग्रेस को केरल जैसे बड़े राज्य में 10 साल बाद सत्ता मिलने से नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि यह जीत कांग्रेस के लिए हवा में जोश भरने वाली है।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि केरल की जीत से विपक्ष को अगले चुनावों में भी फायदा होगा। खासकर पंजाब में अगले साल होने वाले चुनावों में यह जोर देगी। उनका मानना है कि यह पल कांग्रेस और विपक्षी दलों के लिए अच्छा संकेत है।
शशि थरूर ने तमिलनाडु के नतीजों पर भी बात की। उन्होंने एक्टर विजय की पार्टी TVK को खास तौर पर सराहा। उन्होंने कहा कि यह पार्टी पहली बार अकेले चुनाव लड़ते हुए बहुमत के करीब पहुंच गई। थरूर ने इसे नया रिकॉर्ड बताया। उन्होंने कहा कि TVK की सफलता BJP या कांग्रेस से अलग तमिलनाडु की अपनी कहानी है।
थरूर के मुताबिक, UDF की जीत साफ तौर पर पुरानी सरकार को मना करने का संदेश है। उन्होंने भरोसा जताया कि नई सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेगी। केरल में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर काम तेज होगा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि थरूर का यह बयान कांग्रेस के अंदर नई उम्मीद जगाने वाला है। केरल की जनता ने वोट देकर सत्ता परिवर्तन किया है और अब सबकी नजर UDF की सरकार पर है कि वह वादे कैसे निभाती है।
इस जीत ने पूरे देश में विपक्षी दलों के बीच चर्चा तेज कर दी है। शशि थरूर जैसे अनुभवी नेता का विश्लेषण दिखाता है कि कांग्रेस अब सिर्फ केरल तक नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों में भी अपनी रणनीति मजबूत करने की तैयारी में है।