केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के सार्वजनिक रूप से गायब रहने पर सियासी हलचल तेज है। मोतियाबिंद सर्जरी के बाद उनकी अनुपस्थिति पर विपक्ष सवाल उठा रहा है, जबकि एलडीएफ को तीसरी जीत की उम्मीद है। अब सबकी नजर चुनाव नतीजों पर है।
Kerala Election 2026: केरल की राजनीति इन दिनों एक अलग ही वजह से चर्चा में है। 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव के बाद जहां आमतौर पर बयानबाजी और हलचल बढ़ जाती है, वहीं इस बार एक अजीब-सी खामोशी ने सबका ध्यान खींच लिया है। वजह हैं मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, जो पिछले कुछ समय से सार्वजनिक मंचों से गायब नजर आ रहे हैं। सरकार की तरफ से आखिरी जानकारी यही दी गई थी कि मुख्यमंत्री चेन्नई के एक निजी अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन करवाने के बाद आराम कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद उनकी कोई ताजा तस्वीर, वीडियो या सार्वजनिक उपस्थिति सामने नहीं आई। बस यही बात अब चर्चाओं और अटकलों का कारण बन गई है।
विपक्ष को तो जैसे मुद्दा मिल गया हो। चुनाव प्रचार के दौरान विजयन लगातार केरल की स्वास्थ्य सेवाओं की तारीफ करते रहे थे। उन्होंने राज्य के हेल्थ सिस्टम को देश के लिए उदाहरण बताया था। ऐसे में अब उनका इलाज केरल के बाहर करवाना विपक्ष के निशाने पर है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर राज्य की व्यवस्था इतनी बेहतर है, तो बाहर जाने की जरूरत क्यों पड़ी?
हालांकि, सरकार इन चर्चाओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में ऑनलाइन कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की है। यानी प्रशासनिक कामकाज जारी है, बस तरीका थोड़ा अलग है। करीब 81 साल के होने जा रहे विजयन अब भी केरल की राजनीति के सबसे मजबूत चेहरों में गिने जाते हैं। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के अंदर यह भरोसा है कि वह लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर इतिहास रच सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो यह राज्य की राजनीति में एक नया रिकॉर्ड होगा।
दूसरी तरफ, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अभी भी अपने अंदरूनी सवालों से जूझ रही है। चुनाव नतीजों का इंतजार तो है ही, लेकिन उससे पहले ही पार्टी के भीतर यह बहस तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री पद के लिए साफ चेहरा कौन होगा। कांग्रेस पार्टी इस उम्मीद में है कि इस साल 10 साल बाद उनकी वापसी केरला में हो सकती है।
इन सबके बीच, विजयन की गैरमौजूदगी ने माहौल को और रहस्यमय बना दिया है। यह सिर्फ स्वास्थ्य कारणों से लिया गया छोटा-सा ब्रेक है या फिर कोई रणनीतिक चुप्पी, यह अभी साफ नहीं है। अब सबकी नजर अगले हफ्ते आने वाले चुनाव नतीजों पर टिकी है। उसी दिन यह भी तय हो जाएगा कि विजयन और उनकी पार्टी सीपीआई(एम) का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जा रहा है।