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SNDP केस में हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा, कहा- कुछ आरोपियों को क्यों बचाया जा रहा? जानिए पूरा मामला

SNDP Microfinance Case: केरल हाई कोर्ट ने SNDP माइक्रोफाइनेंस मामले में अभियोजन मंजूरी में देरी पर सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा कि कुछ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और कुछ को बचाने का पक्षपाती रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।
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SNDP Microfinance Case update
केरल हाईकोर्ट (फोटो-IANS)

SNDP Microfinance Case:केरल हाईकोर्ट ने लंबे समय से चल रहे SNDP माइक्रोफाइनेंस धोखाधड़ी मामले में राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पूछा कि कुछ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जबकि कुछ को कार्रवाई से क्यों बचाया जा रहा है। जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने साफ कहा कि गंभीर मामलों में ऐसा पक्षपाती रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह मामला पिछड़े वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए दिए गए माइक्रोफाइनेंस लोन में गड़बड़ियों से जुड़ा है।

अभियोजन की मंजूरी में देरी पर नाराजगी

हाईकोर्ट ने आरोपियों पर अभियोजन की मंजूरी देने में हो रही देरी को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट को बताया गया कि फाइलें गुरुवार को ही अतिरिक्त मुख्य सचिव तक पहुंची थीं। सरकार ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की जाएगी। जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा कि बार-बार होने वाली ऐसी चूक को सिर्फ गलती नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह जानबूझकर अभियोजन में देरी करने की कोशिश है।

कुछ आरोपियों को क्यों बचा रहे हैं?

कोर्ट ने सरकार के इस रवैये पर भी सवाल उठाया। जज ने पूछा कि कुछ आरोपियों को अभियोजन से क्यों बचाया जा रहा है और कुछ के खिलाफ कार्रवाई क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि इस तरह का पक्षपाती रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे देरी कराने की रणनीति बताते हुए मामले को गंभीरता से लेने की चेतावनी दी।

124 से ज्यादा मामलों की जांच

इस मामले में विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) 124 से ज्यादा मामलों की जांच कर रहा है। आरोपों से जुड़े मामलों में SNDP योगम के पदाधिकारियों के अलावा केरल स्टेट बैकवर्ड क्लासेस डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (KSBCDC) के पूर्व प्रबंध निदेशक भी शामिल हैं। आरोपियों में SNDP योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन का नाम भी शामिल है।ॉ

क्या है SNDP माइक्रोफाइनेंस मामला?

मामला केरल स्टेट बैकवर्ड क्लासेस डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (KSBCDC) की ओर से वर्ष 2003 से 2014 के बीच दिए गए लोन में हेराफेरी का है। ये रकम पिछड़े समुदायों के कल्याण के लिए माइक्रोफाइनेंस योजना के तहत दी गई थी। आरोप है कि इन लोन की रकम में गड़बड़ियां और हेराफेरी हुई थी। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी। इसलिए हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि आदेश पेश नहीं होने पर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है।

Updated on:
11 Sept 2026 06:14 pm
Published on:
11 Sept 2026 06:14 pm