
Kerala VC RSS Controversy: केरल के तीन विश्वविद्यालय कुलपतियों (Vice-Chancellors) के आरएसएस (RSS) कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन गया है। इस मामले में कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे (Priyank Kharge) भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने कुलपतियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को अब किसी खास विचारधारा का अनुसरण करने का संदेश दिया जा रहा है। वहीं कांग्रेस नेताओं की ओर से कुलपतियों से माफी मांगने की मांग की जा रही है।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रियंक खरगे ने कहा कि विश्वविद्यालयों के कुलपति केवल प्रशासनिक पदाधिकारी नहीं होते, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा, "जब कोई व्यक्ति वाइस चांसलर जैसे पद पर होता है, तो वह पूरी यूनिवर्सिटी के लिए जिम्मेदार होता है, जहां लाखों छात्रों का भविष्य तय होता है। अगर आप RSS की ऐसी बैठकों में शामिल होते हैं जो किसी खास विचारधारा को बढ़ावा देती हैं और वैज्ञानिक सोच को विकसित नहीं करतीं, तो आप छात्रों को क्या संदेश दे रहे हैं? क्या आप यह संकेत दे रहे हैं कि उन्हें या तो इस विचारधारा को मानना होगा या फिर अपने एकेडमिक साल के दौरान नतीजों का सामना करना होगा? क्या सच में यही संदेश दिया जा रहा है?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब केरल के नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीशन ने तीन कुलपतियों के RSS कार्यक्रम में शामिल होने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस कदम से कुलपति पद की गरिमा को नुकसान पहुंचा है और यह राज्य की शैक्षणिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सतीशन ने लिखा कि केरल के लोग वाइस-चांसलर के पद का बहुत सम्मान करते हैं।
कट्टर सांप्रदायिकता का प्रचार करने वाले RSS नेता के कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने उस सम्मान को कम किया है। सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाला कोई भी काम, चाहे कोई भी करे, स्वीकार्य नहीं है और उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि RSS के कार्यक्रम में शामिल होने वाले तीनों वाइस-चांसलर को केरल के लोगों से माफी मांगनी चाहिए।
विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी भी खुलकर कुलपतियों के समर्थन में उतर आई है। केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सतीशन की आलोचना करते हुए कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने X पर लिखा, 'यह बात स्वीकार्य नहीं है कि जो मुख्यमंत्री कानून और संविधान को बनाए रखने की शपथ लेते हैं, वे अब वाइस-चांसलरों को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धमका रहे हैं।'