Kiren Rijiju on Rahul Gandhi: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला है। मंत्री रिजिजू ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति राहुल गांधी हैं।
Kiren Rijiju on Rahul Gandhi: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस नेता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके भारत-विरोधी ताकतों से संबंध हैं और वे देश की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति बन गए हैं।
समाचार एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में रिजिजू ने दावा किया कि राहुल गांधी देश और विदेश दोनों जगह नक्सलियों, चरमपंथियों, विचारधारात्मक समूहों और जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से मुलाकात करते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे संपर्क राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं।
मंत्री रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी भारत की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति बन गए हैं, क्योंकि वे भारत-विरोधी ताकतों से जुड़ते हैं और उनसे मुलाकात करते हैं।
इस दौरान उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्पीकर का काम कार्यवाही चलाना, सरकारी काम को आगे बढ़ाना और विपक्षी सांसदों को बोलने का मौका देना है। जिस तरह से वे स्पीकर के चैंबर में घुसे और अपना प्रदर्शन किया, हमारे स्पीकर ओम बिरला ने संयम और नरमी दिखाई। अगर सोमनाथ चटर्जी स्पीकर होते, तो शायद वे सभी को सस्पेंड कर देते।
बता दें कि इससे पहले 12 फरवरी को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव लाने की बात कही थी। भारतीय जनता पार्टी के नेता दुबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता विदेशी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग भी की।
वहीं राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। लोकसभा में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया एक बड़े वैश्विक संकट के दौर से गुजर रही है, जहां एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था खत्म हो रही है, भू-राजनीतिक संघर्ष बढ़ रहे हैं और ऊर्जा व वित्त का हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रहा है।
गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इन चुनौतियों को स्वीकार करने के बावजूद संयुक्त राज्य अमेरिका को ऊर्जा और वित्तीय प्रणालियों का ऐसा इस्तेमाल करने दे रही है, जिसका असर भारत पर पड़ रहा है।