
BJP में शामिल होंगे भूपेन बोरा (Photo-IANS)
Bhupen Bora BJP join: असम में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले प्रदेश में नेताओं का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाने का भी सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चाओं में हैं। भूपेन बोरा की वजह से कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भी अपना स्टाइल बदलना पड़ा है। दरअसल, किसी नेता के पार्टी छोड़ने पर राहुल गांधी ज्यादा लोड नहीं लेते थे, लेकिन भूपेन बोरा के पार्टी छोड़ने पर राहुल को सोचने पर मजबूर कर दिया।
बता दें कि असम का मुद्दा गांधी परिवार के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि हिमंत बिस्व सरमा के कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने गांधी-नेहरू परिवार को बुरा-भला कहा। यही कारण है कि कांग्रेस असम को जीतकर हिमंत बिस्व सरमा को पटकनी देना चाहती है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भूपेन बोरा को फोन किया। उस समय प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई और असम प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह के साथ बोरा की मीटिंग हो रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मीटिंग की बात सीएम सरमा के पास पहुंच गई तो उन्होंने बोरा को सेफ सीट का ऑफर तक दे दिया।
भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के एक दिन बाद पुष्टि कर दी है कि वह बीजेपी में शामिल होंगे। बोरा ने सोमवार सुबह अपना इस्तीफा पार्टी नेतृत्व को सौंपा था। इसके बाद पार्टी में हलचल मच गई और कई वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने उनके घर पहुंचे। हालांकि बोरा ने अंतिम निर्णय के लिए समय मांगा था।
मंगलवार को बोरा ने कांग्रेस नेतृत्व पर खुलकर नाराज़गी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि असम कांग्रेस में निर्णय लेने की शक्ति रकीबुल हुसैन के हाथों में केंद्रित हो गई है। उन्होंने कहा कि एपीसीसी अब “एपीसीसी-आर” बन चुकी है और कई नेता इससे असहज हैं। टिकट वितरण पर भी हुसैन का प्रभाव होने का आरोप लगाया गया।
बता दें कि भूपेन बोरा जिस ‘R’ की बात कर रहे हैं, उसका मतलब रकीबुल हुसैन से है। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद प्रदेश में रकीबुल का पार्टी में कद बड़ा है, क्योंकि उन्होंने धुबरी से चुनाव में जीत दर्ज की थी। रकीबुल ने AIUDF के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को दस लाख से ज़्यादा वोटों से हराया। इससे पहले धुबरी से बदरुद्दीन अजमल लगातार 3 बार से जीत रहे थे।
रकीबुल को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का करीबी भी माना जाता है। वे तरुण गोगोई सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
वहीं बोरा की टीम का आरोप है कि गौरव गोगोई तो प्रदेश अध्यक्ष है, लेकिन फैसले रकीबुल हसन लेते हैं। बोरा का मानना है कि रकीबुल ने हर कमेटी में अपने आदमी सेट कर रखे है। बोरा का आरोप है कि असम की कांग्रेस बांग्लादेशी मुसलमानों को लेकर सॉफ्ट है।
बता दें कि एक समय भूपेन बोरा और हिमंत बिस्व सरमा कांग्रेस पार्टी में साथ रहे हैं। हालांकि बाद में हिमंत ने भले ही कांग्रेस छोड़ दी थी, लेकिन दोनों नेताओं ने रिश्ते कायम रखे। यही बात है कि जब हिमंत बिस्व सरमा ने कांग्रेस छोड़ी थी, तब उन्होंने उन्हें साथ चलने को कहा था, लेकिन बोरा कांग्रेस में ही बने रहे। फिलहाल, हिमंत बोरा को कांग्रेस पार्टी का आखिरी हिंदू नेता बता रहे हैं।
सरमा ने कहा कि भूपेन बोरा की राजनीति मुख्य रूप से असमिया समुदाय के बीच रही है और कांग्रेस में वे अंतिम बड़े हिंदू असमिया चेहरे माने जाते थे। उनके जाने से यह धारणा और मजबूत होगी और यह वास्तविकता भी है कि कांग्रेस अब असमिया मुख्यधारा के लोगों की पार्टी नहीं रह गई है।
कांग्रेस से भूपेन बोरा की नाराजगी की दूसरी वजह असम कांग्रेस के सोशल मीडिया के अध्यक्ष पद को लेकर है। अब तक इस पद पर प्रफुल्ल दास थे, जो कि अब कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए है। बताया जा रहा है कि बोरा उनकी जगह रतुल बोरा को लाना चाहते थे, लेकिन गौरव गोगोई ने किसी अन्य को इसकी जिम्मेदारी दे दी।
कांग्रेस के लिए असम विधानसभा चुनाव कितना महत्वपूर्ण है, इसका इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहली बार गांधी परिवार से स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। यह जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को दी गई है। वे 19 फरवरी को गुवाहाटी पहुंच रही हैं।
बताया जा रहा है कि स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य जिलों का दौरा कर रहे हैं और संभावित उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों और संगठन की स्थिति पर फीडबैक ले रहे हैं।
रोचक बात यह है कि पिछले लोकसभा चुनाव में असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने ही रकीबुल को धुबरी सीट से बदरुद्दीन अजमल के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए तैयार किया था। लेकिन बाद में राजनीतिक हालात ऐसे बदले कि रकीबुल ही भूपेन के निशाने पर आ गए।
Published on:
18 Feb 2026 09:35 am
