सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कहा कि हिरासत का आदेश पुरानी एफआईआर पर आधारित था।
केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि जेल में बंद सामाजिक-पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लद्दाख में Gen Z आधारित आंदोलन खड़ा कर बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात पैदा करना चाहते थे। सरकार ने इसे “राष्ट्र की एकता और सुरक्षा के लिए खतरा” बताते हुए उनकी NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत हुई गिरफ्तारी को जायज ठहराया।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सोनम वांगचुक की एनएसए हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक की गतिविधियां सेसेशनिस्ट (अलगाववादी) मानसिकता को दर्शाती हैं। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच कर रही है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की है।
लाइव लॉ के अनुसार, मेहता ने वांगचुक के हवाले से कहा, “मैं अपनी जान कुर्बान करने को तैयार हूं। मैं पीछे हटने को तैयार नहीं हूं। अगर मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई तो क्या होगा? बांग्लादेश और श्रीलंका के लोगों ने बदलाव लाया है।”
मेहता ने कहा, “ये तीन शब्द ही कलेक्टर (DM) के लिए काफी हैं… गांधी जी का नाम लेते हैं, लेकिन मकसद नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात बनाना है। वह लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं।”
सरकार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि वांगचुक ने उस सेल्फ-इमॉलेशन (आत्मदाह) की घटना का जिक्र किया था, जिसने 2011 के अरब स्प्रिंग आंदोलन को जन्म दिया था।
मेहता ने कोर्ट में कहा, "यही वह चीज है जो वह Gen Z को करने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।"
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कहा कि हिरासत का आदेश पुरानी एफआईआर पर आधारित था। उन्होंने आगे कहा कि हिरासत में लेने वाले अधिकारियों ने वीडियो के कुछ चुनिंदा हिस्सों का इस्तेमाल किया था।
सिबल ने वांगचुक के खिलाफ हिंदू देवी-देवताओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोपों का खंडन किया।
बता दें कि 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया। इसके बाद बाद में उन्हें जोधपुर जेल शिफ्ट किया गया। दरअसल, वांगचुक गिरफ्तारी से दो दिन पहले लद्दाख में राज्य का दर्जा (Statehood) और छठी अनुसूची (Sixth Schedule) की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत और 90 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।