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लीक-फ्री एग्जाम मिशन शुरू: 4 बिंदुओं पर तैयार होगा रोडमैप, PM मोदी की उच्चस्तरीय टीम में किन विशेषज्ञों को मिली जगह?

Leak Free Exam Mission: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की परीक्षा प्रणाली को लीक-फ्री, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है।
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Jul 27, 2026
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लीक-फ्री एग्जाम मिशन शुरू। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

PM Modi Leak Free Exam Mission: देशभर में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों की घटनाओं के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। यह टीम परीक्षा सुधारों के लिए व्यापक सुझाव देगी, जिनके आधार पर भविष्य की सभी प्रतियोगी और अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, तकनीक-संचालित और भरोसेमंद बनाया जाएगा।

PM मोदी ने रविवार रात सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली को विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार परीक्षा से जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई के लिए कानून को और मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रही है।

4 प्रमुख बिंदुओं पर तैयार होगा सुधारों का ब्लूप्रिंट

नई टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए 4 अहम क्षेत्रों पर विशेष फोकस करेगी।

  1. टेक्नोलॉजी का व्यापक इस्तेमाल

परीक्षा आयोजित करने से लेकर परिणाम घोषित करने तक पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक को शामिल करने की योजना तैयार की जाएगी। उद्देश्य ऐसा डिजिटल सिस्टम विकसित करना है जो पूरी तरह सुरक्षित और छेड़छाड़ से मुक्त हो।

  1. पेपर लीक पर स्थायी रोक

प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा माफिया पर प्रभावी नियंत्रण के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र विकसित करने के सुझाव दिए जाएंगे, जिससे संगठित धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सके।

  1. साइबर और डेटा सुरक्षा मजबूत करना

अभ्यर्थियों के डेटा की सुरक्षा, डिजिटल वेरिफिकेशन और परीक्षा प्लेटफॉर्म को साइबर हमलों से सुरक्षित बनाने के लिए नई तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की जाएगी।

  1. परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना

पूरी परीक्षा प्रक्रिया को इस तरह पुनर्गठित करने की योजना बनाई जाएगी जिससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा दोबारा मजबूत हो तथा हर चरण में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

टास्क फोर्स में कौन-कौन हैं और उनकी क्या भूमिका हो सकती है?

नंदन नीलेकणि: डिजिटल सुरक्षा और एन्क्रिप्टेड परीक्षा प्रणाली

आधार और UPI जैसी बड़ी डिजिटल परियोजनाओं का नेतृत्व कर चुके नंदन नीलेकणि परीक्षा प्रणाली के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने संबंधी सुझाव दे सकते हैं। AI आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और सुरक्षित डेटा प्रबंधन के जरिए फर्जी अभ्यर्थियों और डेटा लीक जैसी समस्याओं पर नियंत्रण संभव हो सकता है।

वी. कामाकोटी: साइबर सुरक्षा और AI आधारित परीक्षा प्रणाली

IIT मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (CBT) के सॉफ्टवेयर और सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। AI आधारित प्रश्नों के डायनामिक रैंडमाइजेशन से प्रत्येक उम्मीदवार को अलग क्रम में प्रश्न उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जिससे स्क्रीन शेयरिंग और लोकल सर्वर हैकिंग जैसी घटनाओं पर रोक लग सके।

एस. सोमनाथ: ISRO जैसी जीरो-एरर कार्यप्रणाली

इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ स्पेस मिशनों में अपनाई जाने वाली मल्टी-लेयर सुरक्षा और जीरो-डिफेक्ट सिस्टम को परीक्षा संचालन में लागू करने के सुझाव दे सकते हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परिणाम जारी होने तक हर चरण में अतिरिक्त सत्यापन और सुरक्षा परतें जोड़ने पर उनका अनुभव उपयोगी माना जा रहा है।

तपन डेका: परीक्षा माफिया पर इंटेलिजेंस नेटवर्क

इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका परीक्षा माफिया और संगठित पेपर लीक गिरोहों पर नजर रखने के लिए इंटेलिजेंस नेटवर्क तथा रियल-टाइम साइबर मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने संबंधी सुझाव दे सकते हैं। इससे संदिग्ध गतिविधियों का पहले ही पता लगाया जा सकेगा।

अमृत लाल मीणा: सुरक्षित लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सिस्टम

लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा प्रश्नपत्रों की छपाई, स्टोरेज और परिवहन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के उपाय सुझा सकते हैं। GPS ट्रैकिंग, डिजिटल लॉक और टैम्पर-प्रूफ कंटेनर जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और मजबूत हो सकती है।

अनीता करवाल: छात्र हित और परीक्षा सुधार

पूर्व शिक्षा सचिव और CBSE की पूर्व चेयरपर्सन अनीता करवाल परीक्षा संचालन से जुड़े प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधारों पर सुझाव देंगी। ग्रेस मार्क्स नीति, आंसर-की पर आपत्तियों के निपटारे और परीक्षा केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को और प्रभावी बनाने में उनका अनुभव उपयोगी रहेगा।

सरकार का उद्देश्य क्या है?

सरकार का लक्ष्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं, बल्कि ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जिसमें तकनीक, सुरक्षा और पारदर्शिता तीनों का संतुलित समावेश हो। प्रस्तावित सुधार लागू होने के बाद प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, अभ्यर्थियों की पहचान, परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनने की उम्मीद है। साथ ही, परीक्षा से जुड़े अपराधों पर कड़ी कार्रवाई के लिए कानूनी प्रावधानों को भी और मजबूत किया जाएगा।

Updated on:
27 Jul 2026 10:40 am
Published on:
27 Jul 2026 10:40 am