
Anti Paper Leak Bill Lok Sabha: लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा शुरू हो गई है। सदन में बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस काल में हुए पेपर लीक की संख्या को गिनाया। जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2009 में रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) की परीक्षा का पेपर लीक हुआ। 2011 में ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन (AIEEE), 2012 में एम्स, नई दिल्ली की प्रवेश परीक्षा, 2013 में महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा का पेपर लीक हुआ। अगर मैं इन सभी घटनाओं की सूची गिनाने लगूं, तो विधेयक पर चर्चा ही नहीं कर पाऊंगा।
उन्होंने आगे कहा कि 2010 में उत्तर प्रदेश की बी.एड. प्रवेश परीक्षा का पेपर लीक हुआ। इसके अलावा 2012 में तमिलनाडु लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भी पेपर लीक की घटना हुई। वहीं 2009 में पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा (Joint Entrance Exam) का पेपर भी लीक हुआ।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसलिए इस सरकार ने महसूस किया कि इस समस्या से निपटने के लिए एक समर्पित (विशेष) कानून की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के अंतर्गत चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां हैं—संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सेलेक्शन (IBPS)।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसी प्रकार, उच्च शिक्षा में प्रवेश परीक्षाओं के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) है। एनटीए की स्थापना भी 2017 में इसी सरकार ने की थी।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहली बार 1992 में भारत सरकार, जिसका नेतृत्व कांग्रेस कर रही थी, को एक साझा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी स्थापित करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद 2010 में, यूपीए सरकार के कार्यकाल में भी एक समिति ने यही सुझाव दिया था। मुझे नहीं पता कि किन कारणों या किन निहित स्वार्थों के चलते उस सिफारिश पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि इसलिए मेरा मानना है कि आपको प्रधानमंत्री मोदी और इस सरकार की सराहना करनी चाहिए। इस सरकार ने वह काम पूरा किया है, जो अधूरा रह गया था और जिसे वास्तव में आपको स्वयं अपने कार्यकाल में पूरा कर लेना चाहिए था।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक वास्तव में पहले के 'सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन करने के लिए लाया गया है। यह अधिनियम भी इसी सरकार द्वारा लाया गया था। इतना ही नहीं, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह का संभवतः पहला कानून था।