
यूपी में विधानसभा चुनाव में 18,900 बूथों पर भाजपा का बड़ा प्लान, photo: chatgpt
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने 2024 लोकसभा चुनाव में हुए नुकसान को बूथ स्तर पर पलटने के लिए बड़ा होमवर्क शुरू कर दिया है। पार्टी ने करीब 18,900 ऐसे बूथ चिह्नित किए हैं, जहां वह 2022 विधानसभा चुनाव में जीती थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में इन्हीं बूथों पर वोट-प्रदर्शन के आधार पर पिछड़ गई थी।
इन 18,900 कमजोर बूथों में से करीब 80 फीसदी ग्रामीण इलाकों में हैं, खासकर अवध और पूर्वांचल क्षेत्र में। पार्टी अब यहां गांव, मजरा और बूथ स्तर तक सीधा संपर्क बढ़ाने में जुटी है। संगठन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि किन सामाजिक समूहों का समर्थन खिसका, स्थानीय मुद्दे क्या रहे और संगठनात्मक कमजोरी कहां-कहां सामने आई।
रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा है विकास कार्यों को विपक्ष-प्रभावित इलाकों तक पहुंचाना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मई से अब तक 44 से ज्यादा जिलों की 115 विधानसभा सीटों पर 38,000 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास कर चुके हैं। खास बात यह है कि इन्हीं 115 सीटों में से 67 सीटें ऐसी हैं, जहां 2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को भाजपा से ज्यादा वोट मिले थे, यानी विकास कार्यों का पूरा फोकस उन्हीं इलाकों पर है जहां पार्टी कमजोर पड़ी थी।
सामाजिक समीकरण के मोर्चे पर भाजपा सपा के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट ढूंढने में जुटी है। पार्टी गैर-यादव ओबीसी, दलित, महिला और युवा वर्ग में अपना आधार मजबूत करना चाहती है, जिसके लिए अब नया एपीडी (अगड़ा-पिछड़ा-दलित) फॉर्मूला लागू करने की तैयारी है। मकसद साफ है, सिर्फ राज्यव्यापी नैरेटिव तक सीमित न रहकर जमीनी सामाजिक समीकरण पर भी मजबूत पकड़ बनाना।
पार्टी ने कुल 18,900 कमजोर बूथ चिह्नित किए हैं, जिनमें से 80 फीसदी हिस्सेदारी ग्रामीण बूथों की है। मई 2026 से अब तक 44 जिलों में विकास परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो 115 विधानसभा सीटों को कवर करती हैं। इनमें से 67 सीटें वे हैं जहां 2024 में सपा-कांग्रेस गठबंधन आगे रहा था। इन सभी परियोजनाओं (उद्घाटन और शिलान्यास मिलाकर) की कुल राशि 38,000 करोड़ रुपए है। साफ है कि भाजपा 2027 से पहले हर कमजोर कड़ी को मजबूत करने में जुट गई है।
Updated on:
15 Sept 2026 02:23 am
Published on:
15 Sept 2026 02:23 am
