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Lok Sabha Session: 83 दिन से संसद का सत्र अधर में! 1987 का रिकॉर्ड टूटा, क्या अचानक बुलाया जाएगा विशेष सत्र?

Special Parliament Session: संसद की तारीखों का कैलेंडर भले शांत हो, लेकिन राजनीतिक तापमान लगातार चढ़ रहा है। 1987 के बोफोर्स विवाद के बाद बनी ऐसी ही स्थिति अब नए रिकॉर्ड तक83 दिन से संसद का सत्र अधर में! 1987 का रिकॉर्ड टूटा, क्या अचानक बुलाया जाएगा विशेष सत्र? पहुंच गई है।
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Updated: 4 Nov 2026, 8:28 AM IST
Parliament Monsoon Session
Parliament Monsoon Session: बिना तारीख के थमी संसद, 83 दिन बाद भी राष्ट्रपति की मुहर नहीं! आखिर सरकार की मंशा क्या है? (फोटो सोर्स: ANI)

Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र समाप्त हुए 83 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसकी औपचारिक विदाई अब तक नहीं हुई है। लोकसभा के इतिहास में यह स्थिति सबसे लंबी हो चुकी है। सदन की कार्यवाही फिलहाल ठहरी हुई है, मगर सत्र का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ। इसी असामान्य घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं छेड़ दी हैं। परिसीमन, महिला आरक्षण और संभावित विशेष सत्र को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच सवाल-जवाब तेज हो रहे हैं।

Parliament Monsoon Session: संसद की विदाई में देरी, सियासत में नई हलचल

इस साल 18वीं लोकसभा का आठवां सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था। 13 अगस्त को सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इसे संसदीय भाषा में ‘अनिश्चितकालीन स्थगन’ यानी साइन डाई कहा जाता है। हालांकि राष्ट्रपति की ओर से सत्रावसान की औपचारिक घोषणा नहीं हुई। नतीजा यह है कि 83 दिनों बाद भी सत्र तकनीकी रूप से समाप्त नहीं माना गया है।

इस असामान्य स्थिति के पीछे संभावित विशेष सत्र की चर्चा प्रमुख है। राजनीतिक अटकलें हैं कि सरकार परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों और महिला आरक्षण कानून को लागू करने की प्रक्रिया पर संसद को फिर बुला सकती है। हालांकि अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।

कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब

कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह विशेष सत्र के जरिए परिसीमन विधेयक आगे बढ़ाने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। रमेश ने कहा कि प्रस्तावों की जानकारी विपक्ष को पहले से दी जानी चाहिए और इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रोकने की मांग भी उठाई। कांग्रेस नेता के आरोप राजनीतिक बयान हैं; सरकार की ओर से विशेष सत्र बुलाने की पुष्टि नहीं हुई है।

संविधान में क्या है व्यवस्था?

संविधान के अनुच्छेद 85 के अनुसार संसद के सत्र बुलाने और समाप्त करने की संवैधानिक व्यवस्था राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आती है। आम तौर पर नियमित सत्र के लिए करीब 15 दिन का नोटिस देने की परंपरा है। हालांकि दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं हो सकता।

साइन डाई स्थगन और सत्रावसान में बड़ा अंतर है। स्थगन के बाद सदन की बैठक खत्म होती है, लेकिन सत्र जारी रहता है। राष्ट्रपति की अधिसूचना से ही सत्र औपचारिक रूप से समाप्त होता है। लोकसभा अध्यक्ष नियम 15 के तहत सदन को दोबारा बुला सकते हैं, इसलिए अनिश्चितकालीन स्थगन के बाद भी बैठक संभव है।

बोफोर्स विवाद में भी बना था इतिहास

इससे पहले 1987 में बोफोर्स मामले के दौरान आठवीं लोकसभा का सत्र 76 दिनों तक सत्रावसान के बिना रहा था। फरवरी में शुरू हुआ सत्र मई में अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ और जुलाई में फिर बुलाया गया। इसी दौरान बोफोर्स सौदे की जांच के लिए 30 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति गठित करने का प्रस्ताव पारित हुआ। लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को मिलाकर बनी इस समिति में 20 लोकसभा तथा 10 राज्यसभा सदस्य थे।

1989 में भी बोफोर्स मुद्दे पर सदन में हंगामा हुआ। करीब 100 विपक्षी सांसदों ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आने के बाद सामूहिक इस्तीफे दिए। सदन दोबारा बुलाया गया, लेकिन राजनीतिक संकट गहराता गया। कुछ ही सप्ताह बाद राजीव गांधी सरकार सत्ता से बाहर हो गई और वीपी सिंह के नेतृत्व में नई सरकार बनी।

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4 Nov 2026, 8:28 AM IST
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