तमिलनाडु में डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण को लेकर बीजेपी और मुख्यमंत्री स्टालिन के बीच विवाद तेज हो गया है। बीजेपी ने स्टालिन के बयान को संविधान विरोधी बताते हुए माफी की मांग की है।
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी को लेकर विवाद तेज हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री M.K. स्टालिन के हालिया बयान ने केंद्र और राज्य के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है। इस पूरे विवाद के केंद्र में डिलिमिटेशन और महिला आरक्षण से जुड़ा मुद्दा है। भारतीय जनता पार्टी ने स्टालिन पर संविधान विरोधी टिप्पणी करने का आरोप लगाया है और उनके बयान को तुरंत वापस लेने की मांग की है, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
तमिलनाडु में BJP के प्रवक्ता ए.एन.एस. प्रसाद ने मुख्यमंत्री स्टालिन के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि स्टालिन द्वारा राज्यव्यापी विरोध की चेतावनी देना राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा है। प्रसाद के अनुसार, स्टालिन का यह कहना कि तमिलनाडु ‘ठप’ हो सकता है और देश को मजबूर किया जाएगा, संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। BJP ने इसे ‘एंटी-कॉन्स्टिट्यूशनल’ बताते हुए मुख्यमंत्री से तत्काल बयान वापस लेने की मांग की है।
BJP नेस्टालिन के बयान को द्रविड़ राजनीति की पुरानी सोच से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रवक्ता ने कहा कि यह बयान कहीं न कहीं द्रविड़ मुनेत्र कषगम की पुरानी ‘द्रविड़ नाडु’ की मांग को फिर से जिंदा करने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाषा, जाति और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर राजनीति करके जनता में डर का माहौल बनाया जा रहा है। बीजेपी का कहना है कि यह रणनीति आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर अपनाई जा रही है, जो देश की एकता के लिए नुकसानदेह है।
बीजेपी ने संविधान 106वां संशोधन अधिनियम, 2023 का हवाला देते हुए 33% महिला आरक्षण को ऐतिहासिक कदम बताया। प्रवक्ता ने कहा कि डिलिमिटेशन प्रक्रिया इस आरक्षण के लागू होने के लिए जरूरी है और स्टालिन का विरोध इसे बाधित कर सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि डिलिमिटेशन से तमिलनाडु के हित प्रभावित नहीं होंगे। बीजेपी ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राज्य में बड़े विकास कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि किसी भी तरह के विरोध के बावजूद यह संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।