राष्ट्रीय

Machine Readable Voter List क्या है? ECI के नए नियम से कैसे बदलेगी वोटर लिस्ट, SIR और SSR में क्या अंतर

Difference between SIR and SSR: चुनाव आयोग ने मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट देने पर सहमति दी। जानें इसका मतलब, SIR और SSR में अंतर और 17 राज्यों में वोटर लिस्ट रिवीजन की पूरी जानकारी। पढ़ें खबर विस्तार से...
4 min read
• •
Oct 17, 2026
ECI
चुनाव आयोग। (फोटो- IANS)

Special Summary Revision: 16 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया। विपक्षी दलों के भारी विरोध और आंतरिक बैठकों में उठे सवाल के बाद मशीन रीडेबल वोटर्स रोल जारी करने पर सहमति जता दी है। निर्वाचन आयोग ने यह कदम देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो रहे 'स्पेशल समरी रिवीजन' के तहत लागू किया है।

कांग्रेस ने लगाया था इमेज या फोटो फॉर्मेट में वोटर लिस्ट जारी करने का आरोप

लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि संस्थान जानबूझकर इमेज या फोटो फॉर्मेट में लिस्ट जारी करता है। इससे फर्जी या डुप्लीकेट वोटरों को ढूंढना नामुमकिन हो जाता है। मशीन रीडेबल वोटर्स रोल जारी होने से अब जांचना आसान हो जाएगा।

अब कहा जा रहा है कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को अब ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट, दोनों चरणों में हार्ड कॉपी के साथ-साथ सर्च करने योग्य PDF दी जाएगी। इससे वे कंप्यूटर पर आसानी से नाम खोज सकेंगे। हालांकि, निजता की सुरक्षा को देखते हुए चुनाव आयोग डिजिटल कॉपी में वोटरों की तस्वीरें प्रदर्शित नहीं करेगा। जानकारी सामने आई है कि चुनाव आयोग इस बार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के साथ जोड़े गए, हटाए गए और संशोधित नामों की सप्लीमेंट्री लिस्ट भी राजनीतिक दलों को देगा।

Machine-readable electoral roll क्या है?

ये ऐसे वोटर रोल होते हैं, जिसे मशीन द्वारा पढ़ा जा सकता है। इसके टेक्स्ट PDF या डिजिटल फाइल जैसे होते हैं। स्कैन करने के बाद इसे कंप्यूटर द्वारा खोजा जा सकता है। साथ ही, विश्लेषित किया जा सकता है। इसमें मतदाता का नाम, पता और क्षेत्रीय विवरण कंप्यूटर द्वारा सीधे पढ़ा जा सकता है। साल 2019 से पहले कुछ राज्यों ने ऐसी टेक्स्ट आधारित सूचियां डाली थी। कई लोगों ने उनमें गड़बड़ियां उजागर की थी।

साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट में (कांग्रेस बनाम चुनाव आयोग, कमलनाथ मामला) ने चुनाव आयोग को टेक्स्ट सूची देने के लिए मजबूर करने से इनकार कर दिया था। चुनाव आयोग ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मशीन पठनीय सूचियां देना बंद कर दिया। उस समय के मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने कहा कि यदि पूरी सूची सार्वजनिक हो गई तो विदेशी ताकतें भारतीय नागरिकों के पूरा नाम और पते का दुरुपयोग कर सकती हैं। साल 2023 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद राहुल गांधी ने इसे गंभीर मुद्दा बताया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (EC) से मांग की थी कि सभी राजनीतिक दलों को मशीन-पठनीय मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाए। कांग्रेस ने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने लगभग 11,965 डुप्लीकेट प्रवर्तियां खोजी थी।

SSR 2027 क्या है? 17 राज्यों में वोटर लिस्ट Revision का पूरा Schedule समझें

SSR यानी स्पेशल समरी रिवीजन का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना है। इसके तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने, दर्ज जानकारी में सुधार करने और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना है। वहीं, मतदाता सूची में नाम जोड़ने, दर्ज जानकारी में सुधार करने और नियमानुसार अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 25(1) के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण के तीन तरीके बताए गए हैं। पहला- गहन पुनरीक्षण, दूसरा- संक्षिप्त पुनरीक्षण और तीसरा आंशिक गहन और आंशिक संक्षिप्त पुनरीक्षण। चुनाव आयोग अब कुछ विशेष गतिविधियों के साथ संक्षिप्त पुनरीक्षण कराता है। इसमें घर-घर जाकर सत्यापन, मतदान केंद्रों का युक्तिकरण व विशेष अभियान शामिल है।

चुनाव आयोग ने इस चरण में कुल 17 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेश में SSR करा रहा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, केरल, असम, मणिपुर, तमिलनाडु, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप और पुदुचेरी में SSR जारी है।

SSR और SIR में क्या अंतर है?

चुनाव आयोग SSR के तहत मौजूदा मतदाता सूची को अपडेट करता है। इसके तहत आने वाले दावे और आपत्तियों के जरिए नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। मौजूदा मतदाताओं के विवरण में पहले से मौजूद असंगतियों को सुधारा जाता है। SSR के तहत पहली बार वोट देने वाले मतदाता भी अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज करा सकते हैं।

जबकि, SIR में चुनाव आयोग मतदाता सूची की गहन जांच करता है। इसमें मतदाताओं की जानकारी जुटाने और उसका सत्यापन करने के बाद मतदाता सूची का प्रारूप तैयार किया जाता है। इसके बाद सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया जाता है। यानी एसएसआर में मौजूदा सूची को अपडेट किया जाता है, जबकि एसआईआर में गहन सत्यापन के जरिए मतदाता सूची तैयार की जाती है।

Voter List में नाम कैसे Check करें? EPIC Number से Electoral Roll Verification का तरीका

चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट electoralsearch.eci.gov.in खोलें। यहाँ नाम तीन तरीकों से खोजा जा सकता है: वोटर आईडी (EPIC) नंबर से, मोबाइल नंबर से, या नाम और जन्मतिथि जैसी निजी जानकारी से। EPIC नंबर से सर्च करने के लिए “Search by EPIC” चुनें, फिर अपना EPIC नंबर और राज्य डालें और कैप्चा भरकर सर्च करें। यह सबसे आसान तरीका है।

Form 6, Form 7 और Form 8 क्या हैं? Voter Registration और Correction के लिए कौन-सा Form भरें

वोटर लिस्ट में नया नाम जुड़वाने के लिए Form 6 भरना होता है। फॉर्म-6A के तहत एनआरआई (विदेशी) मतदाताओं के पंजीकरण के लिए काम में लाया जाता है। फॉर्म-7 के तहत वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटवाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। जबकि, फॉर्म-8 में नाम, पता या फोटो में संशोधन, वोटर आईडी कार्ड बदलवाने और दिव्यांग जन श्रेणी में पंजीकरण कराने के लिए किया जाता है।

Updated on:
17 Oct 2026 01:34 pm
Published on:
17 Oct 2026 01:30 pm