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मद्रास हाईकोर्ट ने उपचुनाव रोकने की याचिका खारिज की, कहा- कानून बनाना विधायिका का काम

Madras High Court: मद्रास हाईकोर्ट ने मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनावों पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि नए चुने गए विधायकों के इस्तीफे और दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक के लिए कानून बनाना विधायिका का काम है।
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Sep 24, 2026
Madras High Court
मद्रास हाई कोर्ट (File Photo)

Tamil Nadu By-Election: मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। इसमें मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव कराने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इन दोनों सीटों पर उपचुनाव अन्नाद्रमुक के दो विधायकों मर्गदम कुमारवेल और पी. सत्याभामा के इस्तीफा देने के बाद जरूरी हुए हैं। ये अब सत्ताधारी टीवीके की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं।

दोनों विधायकों को चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकते

चेन्नई के एक अधिवक्ता के. सुथन द्वारा दायर इस याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने कहा कि अदालत याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई यह राहत नहीं दे सकती कि नए चुने गए विधायकों को इस्तीफा देने और उन्हीं निर्वाचन क्षेत्रों में दोबारा उपचुनाव लड़ने से रोका जाए। पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई राहत को लागू करने के लिए कानून बनाना विधायिका का काम है।

उपचुनाव पर लगाएं रोक

इन क्षेत्रों में मतदान 6 अक्टूबर को होना तय है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आर. सिंगारवेलन ने अदालत से अनुरोध किया कि जब तक याचिका का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक मदुरांतकम और धारापुरम में होने वाले उपचुनावों पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए जाएं। वकील ने अदालत पर जोर दिया कि वह भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को ऐसे उपाय लागू करने के निर्देश दे, जिससे नए चुने गए विधायक पद से इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी में शामिल न हों और दोबारा चुनाव न लड़े।

उपचुनाव खर्च वसूली पर हाईकोर्ट का जवाब

इसके अलावा, उन्होंने मांग की कि ऐसे इस्तीफा देने वाले विधायकों से उपचुनाव कराने का खर्च वसूला जाए, क्योंकि उनके इस्तीफे के कारण करदाताओं पर वित्तीय बोझ पड़ता है। हालांकि, पीठ ने वकील से सवाल किया कि क्या अदालत उन विषयों पर कानून बना सकती है जो विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, ताकि दल बदल करने वालों को चुनाव लड़ने से रोका जा सके और इस्तीफे के कारण होने वाले चुनावी खर्च की उनसे वसूली की जा सके। अदालत ने पूछा कि प्रार्थना वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है, लेकिन विधायकों को जवाबदेह बनाने का कानून में कोई प्रावधान नहीं है, ऐसे में अदालत इस पर निर्देश कैसे जारी कर सकती है?

चुनाव आयोग की दलील

भारत निर्वाचन आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे स्थायी वकील निरंजन राजागोपालन ने तर्क दिया कि कानून में वैधानिक प्रावधानों के अभाव में उम्मीदवारों से चुनाव का खर्च नहीं वसूला जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग की भूमिका चुनाव परिणामों की घोषणा के साथ ही समाप्त हो जाती है और किसी विधायक के इस्तीफे जैसे मामलों से निपटना विधानसभा अध्यक्ष का काम है।

Updated on:
24 Sept 2026 05:11 pm
Published on:
24 Sept 2026 04:56 pm