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Ajit Pawar के वो विदेशी कनेक्शन: दुबई से इजराइल तक,’दादा’ ने महाराष्ट्र को कैसे बनाया ग्लोबल ब्रांड ?

Ajit Pawar international relations : उप मुख्यमंत्री अजित पवार की उन सीक्रेट विदेश यात्राओं का खुलासा, जिनसे महाराष्ट्र में आया करोड़ों का निवेश। जानिए विदेशों से उनके कनेक्शन।

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Jan 28, 2026
अजित पवार की विमान हादसे में मौत (Photo: IANS)

Ajit Pawar foreign tours: महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार (Ajit Pawar) को अक्सर एक कड़क और देसी मिज़ाज का नेता माना जाता था, लेकिन उनकी प्रशासनिक सोच पूरी तरह वैश्विक थी। उन्होंने अपनी लंबी राजनीतिक पारी के दौरान कई देशों की यात्राएं कीं, जिनका मकसद केवल सैर-सपाटा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के लिए विदेशी निवेश (Foreign Investment) और आधुनिक तकनीक लाना था। 28 जनवरी 2026 को उनके निधन के साथ ही प्रदेश ने एक ऐसा नेता खो दिया, जिसने बारामती (Baramati Model) जैसी छोटी जगह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान (Maharashtra Development) दिलाई।

दुबई और खाड़ी देशों से निवेश का रिश्ता

अजित पवार का संयुक्त अरब अमीरात (UAE), विशेष रूप से दुबई से गहरा जुड़ाव था। उन्होंने कई बार खाड़ी देशों का दौरा किया और वहां के बड़े व्यापारिक घरानों के साथ सीधे संबंध स्थापित किए। उनका मुख्य उद्देश्य पुणे और बारामती को 'ऑटोमोबाइल और आईटी हब' के रूप में प्रमोट करना था। वे दुबई के इंफ्रास्ट्रक्चर से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने बारामती की सड़कों और टाउन प्लानिंग में उसी 'दुबई मॉडल' की झलक पेश करने की कोशिश की।

सिंगापुर का अनुशासन और यूरोप की तकनीक

'मैनेजमेंट गुरु' के रूप में विख्यात अजित पवार ने सिंगापुर की यात्रा वहां के प्रशासनिक ढांचे और स्वच्छता मॉडल को समझने के लिए की थी। वे अक्सर कहते थे कि महाराष्ट्र की नगरपालिकाओं को सिंगापुर की तरह काम करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने जर्मनी और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों का दौरा विशेष रूप से 'वॉटर मैनेजमेंट' और 'मॉडर्न एग्रीकल्चर' के लिए किया। महाराष्ट्र के गन्ना बेल्ट में आज जो सिंचाई तकनीकें दिखती हैं, उनके पीछे 'दादा' के उन्हीं विदेशी दौरों का अध्ययन था।

इजराइल का कृषि मॉडल और अंतरराष्ट्रीय वित्त

अजित पवार उन चुनिंदा भारतीय नेताओं में से थे जिन्होंने इजराइल के 'ड्रिप इरिगेशन' (टपक सिंचाई) तकनीक को बहुत करीब से देखा और उसे महाराष्ट्र में लागू करवाया। राज्य के वित्त मंत्री के तौर पर उन्होंने विश्व बैंक (World Bank) और एशियाई विकास बैंक (ADB) के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। उनकी 'रिजल्ट ओरिएंटेड' छवि के कारण विदेशी निवेशक उन पर भरोसा करते थे। आज उनके जाने से वो कड़ी टूट गई है जो महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास को वैश्विक पूंजी से जोड़ती थी।

अंतरराष्ट्रीय जगत में हलचल

दुबई के व्यापारिक समूह: कई खाड़ी देशों के निवेशकों ने अजित पवार के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें एक 'विश्वसनीय मित्र' बताया है।

एनआरआई समुदाय: अमेरिका और यूरोप में बसे महाराष्ट्र के प्रवासियों (NRIs) ने कहा कि उन्होंने अपना सबसे बड़ा समर्थक खो दिया है, जो निवेश के लिए हमेशा प्रेरित करता था।

प्रशासनिक अधिकारी: पूर्व सीएस (Chief Secretary) का कहना है कि दादा की विदेश यात्राओं की फाइलें हमेशा ठोस नतीजों से भरी हुई होती थीं।

क्या रुक जाएगा विदेशी निवेश ?

अजित पवार के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन विदेशी परियोजनाओं और निवेश प्रस्तावों पर वे काम कर रहे थे, उनका क्या होगा? क्या उनके बाद कोई ऐसा नेता आएगा जो उसी गंभीरता के साथ वैश्विक मंचों पर महाराष्ट्र का पक्ष रख सके? आने वाले महीनों में होने वाले निवेश सम्मेलनों पर 'दादा' की कमी साफ तौर पर खलेगी।

एक 'देसी' नेता का 'विदेशी' मैनेजमेंट

अजित पवार का एक अहम पहलू यह था कि वे विदेश में भले ही सबसे आधुनिक तकनीकों को देखते थे, लेकिन उनके व्यवहार में हमेशा एक 'मराठी माणुस' की सादगी और कड़कपन बना रहता था। उन्होंने कभी भी अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हीं जड़ों को वैश्विक खाद-पानी देने का काम किया।

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