Rajya Sabha seat contest in MVA alliance: महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव में महाविकास आघाड़ी के भीतर सीट को लेकर खींचतान तेज हो गई है। एनसीपी (एसपी) ने शरद पवार की उम्मीदवारी के संकेत दिए हैं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस भी अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत कर रही हैं। संख्याबल, रणनीति और संभावित समझौते पर टिकी है एक सीट की जंग।
Maharashtra Rajya Sabha election 2026: महाराष्ट्र की 7 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। इसके लिए महाराष्ट्र में महाराष्ट्र विकास आघाड़ी (MVA) के बीच रस्साकशी तेज हो गई है। दरअसल, 288 सदस्यीय विधानसभा में संख्या बल के आधार पर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (भाजपा, शिवसेना और एनसीपी) अपनी छह सीटें आसानी से निर्विरोध जीतता दिख रहा है। वहीं विपक्षी गठबंधन महाराष्ट्र विकास आघाड़ी (MVA) के पाले में एकमात्र सुरक्षित सीट के लिए खींचतान तेज हो गई है।
दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के 131 विधायक, शिवसेना के 57 और एनसीपी के 40 विधायक हैं। इस तरह सत्तारूढ़ गठबंधन के पास छह सीटें निर्विरोध जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है। वहीं शिवसेना (यूबीटी) के 20 विधायक, कांग्रेस के 16 और एनसीपी (एसपी) के 10 विधायक हैं। इस तरह कुल मिलाकर विपक्ष के पास 46 वोट हैं, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, इसके लिए विपक्षी गठबंधन के तीनों दलों के बीच पूर्ण सामंजस्य अनिवार्य है, क्योंकि इस जीत के लिए कम से कम 37 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता है। सस्पेंस इस बात को लेकर है कि महाविकास आघाड़ी का कौन-सा घटक दल यह सीट हासिल करेगा।
एनसीपी (एसपी) ने स्पष्ट किया है कि पार्टी कार्यकर्ता और नेता शरद पवार को फिर से राज्यसभा में देखना चाहते हैं। सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे जैसे वरिष्ठ नेता इस संबंध में उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेतृत्व से बातचीत करेंगे। हाल ही में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद पवार की राजनीतिक सक्रियता फिर से बढ़ने की उम्मीद है और पार्टी उनके नामांकन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रही है। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी कहा है कि शरद पवार की राज्यसभा में वापसी की इच्छा पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
वहीं, अपनी ही पार्टी के संजय राउत के बयान से अलग रुख अपनाते हुए शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने संख्या बल के आधार पर राज्यसभा सीट पर अपनी पार्टी का दावा ठोका है। उन्होंने याद दिलाया कि 2020 में उनकी पार्टी ने अपने कोटे की एक सीट एनसीपी को दी थी, इसलिए इस बार यह सीट उन्हें मिलनी चाहिए। आदित्य ठाकरे ने कहा कि उनके सांसद संजय राउत और प्रियंका चतुर्वेदी ने सदन में हमेशा जनहित के मुद्दे उठाए हैं। साथ ही, पार्टी के भीतर एक धड़ा उद्धव ठाकरे को राज्यसभा भेजने के पक्ष में है, क्योंकि उनका विधान परिषद का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है।
उधर, कांग्रेस ने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई है। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का मानना है कि सामूहिक निर्णय से पहले सहयोगियों को अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। कांग्रेस नेताओं को निजी तौर पर यह आशंका है कि यदि भविष्य में एनसीपी के दोनों गुटों में समझौता होता है, तो कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार का पाला बदलना पार्टी के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकता है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस पवार की उम्मीदवारी का समर्थन कर सकती है, लेकिन व्यापक समझौते के तहत एमएलसी चुनावों में समायोजन की मांग भी कर सकती है। कांग्रेस इस समर्थन के बदले विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों में अपने लिए जगह बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
अप्रैल में महाराष्ट्र से राज्यसभा से सात सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनमें भाजपा के डॉ. भागवत कराड और धैर्यशील पाटिल, NCP (SP) से शरद पवार और फौजिया खान, जबकि शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी हैं। वहीं कांग्रेस की रजनी पाटिल और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया से रामदास आठवले रिटायर होने वाले हैं।