
सुप्रीम कोर्ट ने एमपीलैड्स (MPLADS) परियोजनाओं में कथित बाधा के मामले में अधिकारियों को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की शिकायतों पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, यदि सांसद संतुष्ट नहीं होती हैं, तो उन्हें हाई कोर्ट जाने की छूट भी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर सर्किट हाउस में ठहरने की व्यवस्था को लेकर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की शिकायत का समाधान कर दिया है।
कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। महुआ मोइत्रा ने अपने संसदीय क्षेत्र कृष्णानगर में 'मेंबर ऑफ पार्लियामेंट लोकल एरिया डेवलपमेंट स्कीम' (MPLADS) के कार्यों में कथित बाधा डालने का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से सांसद महुआ मोइत्रा की शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान दें।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कृष्णानगर के सरकारी सर्किट हाउस से जबरन हटाए जाने और 1 सितंबर के उस सर्कुलर का विरोध किया था जिसमें सांसद के ठहरने से 3 दिन पहले सूचना देने की शर्त रखी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोइत्रा को अपनी यात्रा से केवल एक दिन पहले जिला प्रशासन को सूचित करना होगा, जिसके बाद प्रोटोकॉल के अनुसार ठहरने की व्यवस्था कर दी जाएगी। इस तरह कोर्ट के निर्देश से 1 सितंबर के उस सर्कुलर में बदलाव हो गया है, जिसमें तीन से चार दिन पहले सूचना देना अनिवार्य किया गया था। अब सांसद को केवल एक दिन पहले जानकारी देनी होगी, जिससे उनकी यात्रा और ठहरने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान हो जाएगी।
एमपीलैड्स यानी सांसद क्षेत्रीय क्षेत्र विकास योजना के तहत सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र में विकास कार्यों की सिफारिश करने का अधिकार मिलता है। इस योजना के जरिए स्थानीय स्तर पर सड़क, पेयजल, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम कराए जाते हैं। मोइत्रा का आरोप है कि कृष्णानगर में इन्हीं परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अड़चनें पैदा की जा रही थीं।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से महुआ मोइत्रा को बड़ी राहत मिली है। सर्किट हाउस के मामले में जहां कोर्ट ने सीधे समाधान कर दिया, वहीं MPLADS परियोजनाओं के मामले में अधिकारियों को शिकायतों पर ध्यान देने के निर्देश के साथ हाई कोर्ट जाने का विकल्प भी बरकरार रखा गया है।