
राहुल गांधी(फोटो-ANI)
Supreme Court hearing: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं द्वारा मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका को राकेश कुमार सिंह की पहले से लंबित एक याचिका के साथ जोड़ दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इन याचिकाओं पर नोटिस जारी किए हैं और मामले की सुनवाई 27 अक्टूबर को तय की है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची से जुड़े विवादों, दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद पुलिस की कार्रवाई, तथा महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए भी तारीखें तय कर दी हैं।
राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर मूल याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार अन्य चुनाव आयुक्तों की औपचारिक सहमति या मंजूरी के बिना एकतरफा फैसले ले रहे हैं।
वहीं, राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिकाओं में मुख्य रूप से चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता, फॉर्म 6 और 7 के इस्तेमाल और आयोग के फैसले लेने की प्रक्रिया कू लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
इसके अलावा दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़े मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट 3 नवंबर को करेगा। इसमें जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन और उससे जुड़े कानूनी विवाद भी शामिल हैं। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार से जुड़े मामले की सुनवाई 5 नवंबर को होगी। इस मामले को दिल्ली विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य याचिकाओं से अलग रखा गया है।
अदालत ने 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की है। इस दिन, अदालत मुख्य रूप से BNSS की धारा 172 की संवैधानिक वैधता की जांच करेगी, जो पुलिस द्वारा जारी कानूनी निर्देशों का पालन करने से संबंधित है। इसके अलावा, अदालत धारा 163 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी विचार करेगी।
इन मामलों से निपटने के लिए, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने नोडल वकील को निर्देश दिया है कि वे सभी याचिकाओं को उनमें उठाए गए समान मुद्दों और कानूनी बिंदुओं के आधार पर अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत करें। इस काम के लिए 28 अक्टूबर की समयसीमा तय की गई है। कोर्ट का मानना है कि इससे केंद्र सरकार और संबंधित विभागों के लिए एक संयुक्त जवाबी हलफनामा दाखिल करना आसान हो जाएगा।
Updated on:
16 Oct 2026 10:11 am
Published on:
16 Oct 2026 10:11 am
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