
Gopal Sankaranarayanan:दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 7 याचिकाओं से गोपाल शंकरनारायणन ने बनाई दूरी (फोटो सोर्स: ANI)
Supreme Court Delhi Protest Case: दिल्ली में प्रदर्शनों, पुलिस की कार्रवाई और नागरिकों के विरोध दर्ज कराने के अधिकार से जुड़े मामलों की सुनवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन (Gopal Shankaranarayanan) ने अदालत में सुनवाई के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद सात याचिकाओं में पैरवी से हटने का फैसला किया है। इस कदम ने अदालती कार्यवाही के दौरान वकीलों की भूमिका, कोर्टरूम के अनुशासन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को दिल्ली में प्रदर्शन से संबंधित करीब 46 मामलों पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ इन मामलों की सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में पुलिस कार्रवाई, कथित अवैध हिरासत, आवाजाही पर पाबंदियों, पत्रकारों के अधिकारों और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार जैसे मुद्दे उठाए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, जब वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन अपनी बात रख रहे थे, तब उन्हें कई बार रोका गया। इसी दौरान उनके पक्ष की एक अन्य वरिष्ठ महिला वकील द्वारा कथित तौर पर उनसे माइक ले लेने की घटना भी सामने आई। इसके बाद शंकरनारायणन कार्यवाही समाप्त होने से पहले ही अदालत कक्ष से बाहर चले गए।
इस घटनाक्रम के बाद उन्होंने अपने मुवक्किलों को सातों मामलों में आगे पैरवी नहीं करने के फैसले की जानकारी दी। हालांकि, इस घटनाक्रम के सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
इसी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कई याचिकाओं पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किए। अदालत ने संबंधित एजेंसियों को CCTV फुटेज सहित अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की जांच और न्यायिक समीक्षा में इनका उपयोग किया जा सके।
पीठ ने दोनों पक्षों की ओर से नोडल वकील नियुक्त करने और समान प्रकृति के मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में व्यवस्थित करने को भी कहा। संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए 28 अक्टूबर तक की समयसीमा दी गई है। मुख्य मामलों पर अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित है।
इन याचिकाओं का एक महत्वपूर्ण पहलू जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला है। याचिकाकर्ताओं ने इस कदम को चुनौती देते हुए शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी मांगें रखने के अधिकार का मुद्दा उठाया है। इस विषय पर भी शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
भारत में संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक तथा बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, इन अधिकारों पर कानून के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ऐसे में अदालत के सामने चुनौती सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के बीच कानूनी संतुलन के सवाल की भी है।
गोपाल शंकरनारायणन के हटने से संबंधित सात याचिकाओं में आगे की पैरवी कौन करेगा, यह अहम सवाल बना हुआ है। वहीं, CCTV साक्ष्यों, पुलिस कार्रवाई और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े मुद्दों पर केंद्र तथा दिल्ली पुलिस के जवाब अगली सुनवाई में महत्वपूर्ण होंगे।
Updated on:
16 Oct 2026 10:18 am
Published on:
16 Oct 2026 09:53 am
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