Congress attacks Modi foreign policy: कांग्रेस ने विदेश नीति को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी पर भी निशाना साधा है।
Mallikarjun Kharge on Modi Government: विदेश नीति के मुद्दे पर कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कहते हैं कि मैं देश नहीं झुकने दूंगा, लेकिन हो इसके उलट रहा है। कांग्रेस लीडर ने कहा कि चीन से लेकर अमेरिका तक, मोदी सरकार की विदेश नीति Wild Pendulum की तरह इधर-उधर झूल रही है। इसका खामियाजा देश की जनता को उठाना पड़ रहा है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि मोदी सरकार 5 साल से चीनी कंपनियों पर लगा बैन हटा रही है। उन्होंने आगे कहा कि गलवान में भारतीय वीर सैनिकों ने जो आहुति दी थी, उनके बलिदान का अपमान पीएम मोदी चीन को क्लीन चिट थमाकर कर चुके हैं। अब चीनी कंपनियों के लिए रेड कार्पेट बिछाकर, वो ये दिखा रहे हैं कि उनकी लाल आंख में चीनी 'लाल रंग' कितना गहरा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अमेरिकी टैरिफ और रूसी तेल पर डोनाल्ड ट्रंप के रुख को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यूएस प्रेसिडेंट ट्रंप रोज़ाना भारत द्वारा रूसी तेल निर्यात पर टिप्पणी कर रहें हैं, लेकिन पीएम मोदी चुप हैं। अपनी नज़रें चुरा रहे हैं। 'सर' वाली बात 'सरेंडर' ज्यादा दिखती है। हमारे लिए विदेश नीति का मतलब, राष्ट्र हित सर्वोपरि होना जरूरी है, पर मोदी सरकार ने हमारी Non-Aligned और Strategic Autonomy की विदेश नीति को गहरी चोट पहुंचाई है। मोदी सरकार की विदेश नीति एक Wild Pendulum की तरह कभी इधर, कभी उधर झुलती है और इसका नुकसान भारत की जनता को हो रहा है। मालूम हो कि हाल ही में ट्रंप ने दावा किया था कि पीएम मोदी ने उनसे 'सर' कहकर बात की और मिलने के लिए समय मांगा।
भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप नाराज हैं। भारत पर अमेरिका का भारी टैरिफ इसी नाराजगी का परिणाम है। कांग्रेस लीडर का मानना है कि इस मुद्दे पर पीएम मोदी की खामोशी जायज नहीं है। इससे पहले भी कांग्रेस विदेश नीति को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साध चुकी है। बता दें कि भारत, चीन के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। नई दिल्ली और बीजिंग सालों के तनाव के बाद रिश्तों को स्थिर करने के लिए सावधानी भरे कदम उठा रहे हैं। इसमें सीधी उड़ानें भी शामिल हैं, जबकि चीनी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर प्रतिबंध अभी भी लागू हैं।