
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में हुई विजय शंखनाद रैली के बाद शुरू हुआ विवाद अब संसद तक पहुंच गया है। रैली के बाद रामलीला मैदान में कराए गए शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर गुरुवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। खरगे ने इसे लेकर सवाल उठाया, वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा सांसद जेपी नड्डा ने घटना को दुखद बताते हुए जांच कराने की बात कही।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मैं हल्द्वानी में था, जहां मैंने रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां लाखों लोग मौजूद थे। उस समय मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया। मैंने केवल सरकार से जुड़े मुद्दों को दोहराया। लेकिन मेरे भाषण के बाद, बीजेपी के लोगों ने उस मंच को 'शुद्ध' करने के लिए वहां हवन किया। क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? मैं विपक्ष का नेता हूं।
खरगे के आरोपों पर जेपी नड्डा ने कहा कि जो कुछ हुआ, वह दुखद है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना केवल खरगे के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए दुखद है। सरकार मामले की जांच कराएगी।
नड्डा ने कहा कि भाजपा ऐसी घटनाओं को स्वीकार नहीं करती। जब खरगे ने कहा कि आप लोग ऐसा करते हैं, तो नड्डा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार घटना की जांच कराने की बात कह रही है और खरगे की भावनाओं का सम्मान करती है।
वहीं, शुद्धिकरण यज्ञ कराने वाले श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के अध्यक्ष गिरीश पांडे और पंडित मोहन शास्त्री ने कहा कि रामलीला मैदान एक पवित्र स्थान है, जहां रामलीला का मंचन होता है। उनका आरोप है कि रैली के दौरान सनातन और हिंदू धर्म से जुड़े मुद्दों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुईं।
उन्होंने कहा कि मैदान की धार्मिक मर्यादा बहाल करने और सद्बुद्धि की कामना के लिए शुद्धिकरण हवन कराया गया। संगठन ने खरगे पर सनातन और हिंदू संगठनों के विरोध में बयान देने का आरोप भी लगाया।
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए इस हवन-पूजन के बाद उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में जुबानी जंग तेज़ हो गई है। एक ओर जहां धार्मिक संगठन इसे मैदान की पवित्रता से जोड़ रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे भाजपा और उससे जुड़े संगठनों की प्रायोजित राजनीतिक साजिश बता रही है।