13 अगस्त 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मक्का पैक्ट से न घबराएं न नजरअंदाज करें: शशि थरूर की भारत सरकार को संतुलित रणनीति अपनाने की सलाह

सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के मक्का रक्षा समझौते पर पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने भारत के लिए साफ रणनीति बताई। उन्होंने कहा- यह इस्लामिक नाटो नहीं, बल्कि सामूहिक सुरक्षा की छतरी है। सऊदी-भारत रिश्ते मजबूत रहेंगे, पाक की वजह से असर नहीं पड़ेगा। तकनीकी साझेदारी पर नजर रखने की जरूरत।
2 min read
Google source verification
defense agreement in Mecca.

मक्का में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने किया बड़ा रक्षा समझौता | (फोटो - @iYogeshMishra)

Mecca Pact Shashi Tharoor: सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते को लेकर भारत में नई बहस छिड़ गई है। इस पर पूर्व विदेश राज्य मंत्री व कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत के लिए एक साफ और संतुलित रणनीति अपनाने की सलाह दी है। थरूर ने कहा कि भारत को मक्का पैक्ट से न तो घबराने की जरूरत है, और न ही इसे मामूली मानकर नजरअंदाज करने की।

तीनों देश अपना-अपना लक्ष्य पूरा करना चाहते हैं

उन्होंने कहा कि इस पैक्ट के जरिए तीनों देश (सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान) अपना-अपना लक्ष्य पूरा करना चाहते हैं। थरूर ने अपने लेख में बताया है कि सऊदी अरब की चिंता ईरान और यमन से आने वाले खतरों की है। तुर्किये अपने रक्षा उद्योग का बाजार बढ़ाना चाहता है और इस्लामी दुनिया में अपनी पैठ मजबूत करना चाहता है। वहीं पाकिस्तान की नजर आर्थिक मदद, कूटनीतिक समर्थन और सैन्य तकनीक पर है। यह एक कसा हुआ सैन्य गठबंधन नहीं, बल्कि सामूहिक सुरक्षा की एक छतरी जैसा ज्यादा लगता है।

सऊदी अरब और भारत के बीच रिश्ते मजबूत

थरूर ने कहा कि सऊदी अरब और भारत के बीच रिश्ते मजबूत हुए हैं। व्यापार, ऊर्जा और खुफिया सहयोग बढ़े हैं। ऐसे में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भी नहीं चाहेंगे कि पाकिस्तान की वजह से उनके भारत के रिश्ते पर कोई आर्थिक असर पड़े। उन्होंने अपने लेख में याद दिलाया कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सऊदी अरब पूरी तरह से खामोश रहा था, जबकि तुर्किये ने सिर्फ ड्रोन बेचने तक ही मदद सीमित रखी थी।

समझौते की असली अहमित सैन्य नहीं बल्कि तकनीकी साझेदारी

शशि थरूर का मानना है कि इस समझौते की असली अहमित सैन्य नहीं बल्कि तकनीकी साझेदारी में है। उन्होंने कहा कि तुर्किये की ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक, सऊदी पैसे और पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर रावलपिंडी की सैन्य क्षमता को बढ़ा सकती है। इसलिए भारत को अपनी रक्षा खुफिया एजेंसियों को सतर्क रखना होगा। थरूर ने यह भी कहा कि भारत को सऊदी अरब से यह स्पष्ट तौर पर बात करे कि मक्का पैक्ट पश्चिम एशिया के लिए न कि पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ ढाल बनने के लिए।

'इस्लामिक नेटो' कहना जल्दबाजी

उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी जमीन से आतंकवाद होता है और भारत जवाब में सटीक कार्रवाई करता है, तो यह किसी भी तरह से उत्तेजक हमला नहीं माना जाएगा, इसलिए सऊदी अरब या तुर्किये के इसमें कूदने की संभावना बहुत कम है। थरूर के मुताबिक यह पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव है, लेकिन इसे अभी से 'इस्लामिक नेटो' कहना जल्दबाजी होगी। असली नाटो में एक साझा कमान ढांचा, पहले से तय सेनाएं और गहरी तकनीकी साझेदारी होती है, जो इस समझौते में अभी नहीं दिखती।

उधर, मक्का पैक्ट को लेकर दुनिया भर के एक्सपर्ट भी बयान दे रहे हैं। यूनाइटेड किंगडम के पूर्व मंत्री रॉरी स्टिवर्ट ने कहा कि सऊदी अरब भारत के साथ युद्ध में नहीं घसीटना चाहेगा। भारत वाला पहलू दिलचस्प है। इज़राइल भी भारत, ग्रीस, साइप्रस और संभावित रूप से UAE के साथ गठजोड़ का नेटवर्क विकसित कर रहा है।