
सुप्रीम कोर्ट (Photo- Patrika)
Supreme Court on Netaji Subhash Chandra Bose: नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। एक वकील ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की गुहार लगाई थी। इस पर CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि हर मामले में स्वतः संज्ञान लेने की जरूरत नहीं है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर उन्हीं असाधारण परिस्थितियों में स्वतः संज्ञान लेता है, जब प्रभावित पक्ष खुद अदालत का रुख करने में सक्षम नहीं होते। पीठ ने वकील से याचिका दायर करने को कहा।
CJI सूर्यकांत ने वकील से कहा, 'आप इस मामले से अच्छी तरह परिचित हैं और आप खुद प्रभावी ढंग से दलील दे सकते हैं। फिर आप स्वतः संज्ञान क्यों चाहते हैं? आप याचिका क्यों नहीं दाखिल कर सकते?'
उन्होंने कहा, 'स्वतः संज्ञान किन परिस्थितियों में लिया जाता है? केवल तब, जब कोई गंभीर कारण हो… पर्यावरण के मामले में जंगल अपनी बात नहीं कह सकता, इसलिए हमें उसकी रक्षा करनी पड़ती है। इसी तरह हाशिए पर रहने वाले लोग अदालत तक नहीं पहुंच सकते।'
CJI ने आगे कहा कि एक मामले में 83 वर्षीय विधवा और उनके नेत्रहीन बेटे की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना पड़ा था, क्योंकि उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। उन्होंने कहा, 'जब एक सक्षम वकील मौजूद है, तो स्वतः संज्ञान क्यों लिया जाए?'
वकील ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा NCERT की किताब के मामले में स्वतः संज्ञान लेने का उल्लेख किया। वकील ने कहा कि उस मामले में कोर्ट ने यह मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया था कि किताब में न्यायपालिका का अपमान किया गया था।
पीठ में CJI सूर्यकांत के साथ मौजूद जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, 'आपका आरोप है कि किसी व्यक्ति ने ऐसा भाषण दिया, जो हेट स्पीच जैसा है। हमें स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुसार इसकी जांच करनी होगी… आप याचिका दाखिल कीजिए।'
भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद नगेंद्रनाथ राय उर्फ अनंत महाराज पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज की भूमिका पर सवाल उठाने का आरोप है। सांसद ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को कथित तौर पर 'युद्ध अपराधी' बताया था।
Updated on:
13 Aug 2026 01:14 pm
Published on:
13 Aug 2026 01:14 pm
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