
Mallikarjun Kharge News: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इमरजेंसी के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी ऐसी घटनाएं नहीं होती थीं, जैसी आज देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि उस दौरान न ट्रेनें रोकी गईं और न ही उड़ानें बंद हुईं। लोग स्वतंत्र रूप से एक जगह से दूसरी जगह आ-जा सकते थे। उन्होंने कहा कि कल भी युवा आंदोलन कर रहे थे, लेकिन इमरजेंसी के दौरान भी इस तरह की घटनाएं नहीं होती थीं। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी के समय वह मंत्री थे। उस दौरान न रेल सेवाएं रोकी गईं और न ही हवाई सेवाएं बाधित हुईं। लोगों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने की सुविधा थी।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवराज उर्स का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह राज्य के शिक्षा मंत्री थे और देवराज उर्स मुख्यमंत्री थे। खरगे के मुताबिक, उस दौरान लोगों को बिना किसी उचित कारण के गिरफ्तार नहीं किया जाता था।
खरगे ने दावा किया कि उस समय कई लोग देवराज उर्स के पास आकर खुद को गिरफ्तार करने का अनुरोध करते थे। हालांकि, देवराज उर्स उन्हें गिरफ्तार करने से इनकार कर देते थे। खरगे के अनुसार, उर्स का कहना था कि जब गिरफ्तारी का कोई आधार ही नहीं है, तो किसी को गिरफ्तार कैसे किया जा सकता है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने अनुभव साझा करते हुए उस दौर की परिस्थितियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय लोगों की आवाजाही पर इस तरह की रोक नहीं थी और बिना वजह गिरफ्तारियां भी नहीं की जाती थीं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी छूट को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य सदस्यों को संरक्षण देने के लिए 2023 में कानून लाया।
मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वह कथित वोट चोरी को जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र में सरकार बनाने के पीछे भी वोट चोरी की भूमिका रही है। खरगे ने कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस का आरोप नहीं है, बल्कि राज्यों में भी सत्ताधारी पक्ष के अपने लोग ऐसी बातें कह रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को संरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार 2023 में कानून लेकर आई थी। उनके मुताबिक, इस कानून के जरिए चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण दिया गया। खरगे ने सवाल उठाया कि आखिर इस तरह की छूट देने की जरूरत क्यों पड़ी।
खरगे ने अपने बयान में कहा कि जिस तरह की छूट चुनाव आयुक्त को दी गई है, वैसी छूट राष्ट्रपति और भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी नहीं मिली है। उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की मंशा पर संदेह जताया।