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कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह? दिल्ली से BJP ने मणिपुर CM के लिए फाइनल किया नाम, RSS से भी कनेक्शन!

मणिपुर में भाजपा विधायक दल की बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया, जिससे उनका नए मुख्यमंत्री बनना तय हो गया। 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन खत्म होने से पहले दिल्ली में रणनीति तय हुई।

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Feb 03, 2026
युमनाम खेमचंद सिंह को मिठाई खिलाते संबित पात्रा। (फोटो- IANS)

मणिपुर में आज विधायक दल की बैठक हुई। जिसमें भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया है। इसके साथ ही खेमचंद के मणिपुर के नए सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया है।

मणिपुर में इस महीने 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन खत्म हो रहा है। इससे पहले ही राज्य में भाजपा ने नए मुख्यमंत्री चुनने की कवायद तेज कर दी थी। अब दिल्ली से भाजपा ने मणिपुर के पूरी रणनीति सेट कर दी है।

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केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ ने पटका पहनाकर युमनाम खेमचंद का स्वागत किया। इस मौके पर मणिपुर स्टेट प्रेसिडेंट और नॉर्थ ईस्ट के इंचार्ज संबित पात्रा मौके पर मौजूद थे। मणिपुर में नई सरकार के गठन के लिए भारतीय जनता पार्टी के विधायक सोमवार को दिल्ली पहुंच गए थे।

कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह?

युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर की राजनीति में बड़े शख्सियत हैं। वे मैतेई समुदाय से हैं और राज्य में शांति बहाली के प्रयासों में सक्रिय दिखे हैं। युमनाम खेमचंद सिंह का खेल जगत में भी बड़ा नाम है। उन्होंने ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।

युमनाम पारंपरिक ताइक्वांडो में 5th Dan ब्लैक बेल्ट प्राप्त करने वाले पहले भारतीय हैं। यह सम्मान अक्टूबर 2024 में मिला, लेकिन मणिपुर में हिंसा के कारण वे सियोल नहीं जा सके। हालांकि, दिसंबर 2025 में सियोल जाकर उन्होंने सर्टिफिकेट प्राप्त किया।

मणिपुर में बड़े पदों पर रहे युमनाम

युमनाम भाजपा के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। युमनाम 2017 में पहली बार भाजपा से विधायक बने। 2022 में उन्होंने दूसरी बार विधायक के रूप में जीत दर्ज की।

2017 से 2022 तक युमनाम मणिपुर विधानसभा के स्पीकर रहे। इस दौरान उन्होंने सदन की कार्यवाही संभाली। इसके बाद 2022 से 2025 तक एन बीरेन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।

आरएसएस से क्या है कनेक्शन?

कई रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषणों में युमनाम खेमचंद सिंह को आरएसएस का सबसे भरोसेमंद कहा जाता है। वे RSS के विचारधारा से मजबूती से जुड़े हुए नेता के रूप में देखे जाते हैं।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जाता है कि उन्होंने RSS की शाखाओं में ही ताइक्वांडो सिखाना शुरू किया था, जिसके बाद वे RSS से करीब आए और BJP में शामिल हुए।

पिछले साल से लागू है राष्ट्रपति शासन

मणिपुर में पिछले साल 13 फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है, जो पूर्व मुख्यमंत्री एन। बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद लंबे समय से चल रही जातीय हिंसा के बीच लागू हुआ था।

बीरेन सिंह के राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के चार दिन बाद, पिछले साल 13 फरवरी को केंद्र सरकार ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था।

2027 तक है कार्यकाल

बता दें कि 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा, जिसका कार्यकाल 2027 तक है, को निलंबित रखा गया था। इस बीच नई सरकार के गठन की कवायद में भाजपा संसदीय बोर्ड ने मणिपुर में विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया।

इससे पहले, पिछले साल 14 दिसंबर को, मणिपुर भाजपा विधायक दल ने नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में शांति प्रक्रिया और हिंसाग्रस्त राज्य से संबंधित अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक आयोजित की थी।

इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह और राज्य विधानसभा अध्यक्ष थोकचोम सत्यव्रता सिंह सहित 34 से अधिक भाजपा विधायकों के साथ-साथ बीएल संतोष, संबित पात्रा और मणिपुर भाजपा अध्यक्ष शारदा देवी भी उपस्थित थीं।

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