राष्ट्रीय

मणिपुर में मिले 24,475 अवैध प्रवासी, सरकार ने 14,992 को वापस भेजा

Illegal Immigrants In Manipur: मणिपुर सरकार ने हाल ही में हज़ारों अवैध प्रवासियों को वापस भेजा है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।
2 min read
Sep 07, 2026
Govindas Konthoujam Singh
गोविंदास कोंथौजम सिंह (Photo - IANS)

बॉर्डर राज्य होने की वजह से मणिपुर (Manipur) में अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) की समस्या नई नहीं है। अक्सर ही राज्य में ऐसे मामले देखने को मिलते हैं, जिनके खिलाफ सरकार कार्रवाई भी करती है। मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम सिंह ने सोमवार को राज्य विधानसभा में बताया कि राज्य के सीमावर्ती जिलों में 24,475 अवैध प्रवासी पाए गए हैं। इनमें से 14,992 को अब तक वापस भेजा जा चुका है, जबकि बाकी लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की प्रक्रिया चल रही है।

म्यांमार से लगती है बॉर्डर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मणिपुर की नॉर्डेर म्यांमार (Myanmar) से लगती है। मणिपुर के पांच जिलों चुराचांदपुर, तेंगनौपाल, चंदेल, कामजोंग और उखरुल की म्यांमार के साथ 398 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली इंटरनेशनल बॉर्डर लगती है और यहीं से अवैध प्रवासी राज्य में प्रवेश करते हैं। राज्य में अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर विपक्षी कांग्रेस विधायक थोकचोम लोकेश्वर सिंह के सवाल का जवाब देते हुए राज्य गृह मंत्री ने सदन में अवैध प्रवासियों का आंकड़ा बताया।

कहाँ कितने अवैध प्रवासी मिले?

राज्य गृह मंत्री ने बताया कि 6,545 अवैध प्रवासी राज्य के कामजोंग जिले में मिले। इसके अलावा 3,560 अवैध प्रवासी तेंगनौपाल जिले में मिले। सबसे ज़्यादा 14,370 अवैध प्रवासी चंदेल जिले में पाए गए।

समिति का हो चुका है गठन

राज्य गृह मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि राज्य सरकार ने पहले ही एक योजना अपना ली है और अवैध प्रवासियों के आगमन और नए गांवों की असामान्य वृद्धि का पता लगाने और उनकी पहचान करने के लिए 7 अगस्त, 2024 को पूर्व मंत्री अवांगबो न्यूमाई की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने समिति की कार्रवाई रिपोर्ट पर एक आदेश भी जारी किया है।

उन्होंने आगे बताया कि 16 फरवरी, 2023 को पूर्व जनजातीय मामलों के मंत्री लेतपाओ हाओकिप की अध्यक्षता में एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया गया था, जिसमें पूर्व मंत्री अवांगबो न्यूमाई और थोनाओजम बसंत कुमार सिंह सदस्य थे। राज्य गृह मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य के गृह विभाग ने 24 मार्च 2023 को एक आधिकारिक कार्यकारी समिति बनाई थी। इस समिति की अध्यक्षता कमिश्नर एस. चौरसिया कर रहे थे और इसके सदस्यों में पुलिस महानिरीक्षक के. कबीब, डिप्टी कमिश्नर, पुलिस अधीक्षक और अनुविभागीय पुलिस अधिकारी शामिल थे। इस समिति का काम अवैध प्रवासियों की पहचान की पुष्टि करना और कैबिनेट उप-समिति की मदद करना था।

उन्होंने आगे कहा कि पहचान की पुष्टि का जो अभियान शुरू हो चुका था, उसे 3 मई 2023 को भड़की जातीय हिंसा के कारण जारी नहीं रखा जा सका। इसके अलावा राज्य सरकार ने संबंधित डिप्टी कमिश्नरों को पहले ही निर्देश दे दिए हैं कि वो अवैध प्रवासियों को स्थानीय भारतीय समुदायों से अलग रखें।

Updated on:
07 Sept 2026 06:22 pm
Published on:
07 Sept 2026 06:22 pm