
Election Commission Controversy: चंडीगढ़ में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के ताजा बयान ने चुनावी राजनीति और विदेश नीति दोनों मोर्चों पर बहस तेज कर दी है। तिवारी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है। इसी के साथ उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति पर भी जोर दिया।
चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चुनाव आयोग और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर तीखे सवाल उठाए हैं। ANI के अनुसार, तिवारी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की और कहा कि SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बड़े बदलावों की पारदर्शी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने का मामला लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है।
तिवारी ने मांग रखी कि हटाए गए मतदाताओं के नाम और उन्हें सूची से बाहर करने के कारण सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मौजूदा प्रक्रिया को पूरी तरह निरस्त किया जाता है तो जून 2024 में मौजूद मतदाता सूची को आधार बनाकर आगे की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव का सीधा असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब SIR को लेकर निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक दबाव बढ़ा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ चुनावी फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन खबरों के बाद कहा कि आयोग के सभी फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।
तिवारी ने इसी मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC से चुनाव आयोग के कामकाज की जांच कराने की मांग भी दोहराई है। इससे पहले उन्होंने चुनावी रोल को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत की बात कही थी।
चुनाव आयोग के मुद्दे के साथ तिवारी ने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के संदर्भ में पाकिस्तान को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों के साथ कूटनीतिक प्रयास तेज करने चाहिए, ताकि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुख्यधारा से अलग करने के लिए व्यापक समर्थन जुटाया जा सके।
यह बयान न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एक पाकिस्तानी पत्रकार के बीच हुई तीखी बातचीत के बाद सामने आया है। जयशंकर ने आतंकवाद से जुड़े सवाल पर पाकिस्तान पर कड़ा पलटवार किया था। तिवारी ने इस रुख का समर्थन करते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता को महत्वपूर्ण बताया।
इस तरह तिवारी के बयान में घरेलू लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े सवालों से लेकर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति तक, दो अलग लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दे एक साथ सामने आए हैं।