
Samik Bhattacharya Statement: राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने बीजेपी सांसद व पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के उस बयान पर तंज कसा है, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद्म भूषण देने की बात कही थी। मनोज झा ने कहा कि वे भट्टाचार्य की "बुद्धिमत्ता" के आगे नतमस्तक हैं।
मीडिया एजेंसी एनएनआई संग बातचीत में मनोज झा ने कहा कि समिक भट्टाचार्य के बुद्धिमत्ता के स्तर को देखते हुए सबसे पहले उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं समिक को जानता हूं। वे बीजेपी के राज्यसभा सदस्य होने के साथ-साथ राज्य अध्यक्ष भी हैं। इस स्तर की 'बुद्धिमत्ता' को देखते हुए और ऐसे माहौल में जब सबूतों के साथ चोरी और डकैती के किस्से सामने आ रहे हैं, ऐसी सोच के लिए उन्हें सबसे पहले भारत रत्न मिलना चाहिए। उसके बाद ही किसी और के बारे में सोचा जाना चाहिए।
दरअसल, बीते दिनों इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों की आलोचना के बीच समिक भट्टाचार्य ने CEC ज्ञानेश कुमार का जोरदार समर्थन किया था और पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों के संचालन की तारीफ की थी। पत्रकारों से बातचीत में भट्टाचार्य ने कहा था कि सच्चाई यह है कि कांग्रेस पार्टी खुद राहुल गांधी की बातों पर ध्यान नहीं देती। वे उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। ज्ञानेश कुमार कम से कम पद्म भूषण के तो हकदार हैं ही।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में लोग बिना किसी डर-धमकी के अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाए और दावा किया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों से कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने के लिए कदम उठाए हैं। भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता इस बात से खुश है कि इतने लंबे समय बाद डर-धमकी को रोका जा सका। हत्या की कोई घटना नहीं हुई, और लोगों को वाकई अपना वोट डालने दिया गया।
इस बीच राजद सांसद मनोज झा ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे विवाद का स्वतः संज्ञान लेगा। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है, बल्कि मुझे पूरा भरोसा है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट अपनी पहल पर और अपने स्तर पर इसे एक अहम मुद्दा मानेगा और तेज सुनवाई के बाद दिशा-निर्देश देगा। उन्होंने कहा कि जो लोग न्याय की तलाश में हैं, उनके लिए सुप्रीम कोर्ट ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने कहा कि संस्थागत पतन की स्थिति हो, तो कोई व्यक्ति विकल्प कहां ढूंढे? विकल्प माननीय सुप्रीम कोर्ट है। उच्चतम न्यायालय घोर अंधेरी गुफा में टिमटिमाती एक रोशनी की तरह है।
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी चुनाव आयोग से इसके सदस्यों के बीच मतभेदों की रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की और कहा कि "असली सच्चाई" मीडिया और देश के सामने लाई जानी चाहिए। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में 14 बार लिखित रूप से असहमति या आपत्ति दर्ज कराई थी। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक नोट्स, सवाल और चर्चाएं उसके संस्थागत कामकाज का हिस्सा हैं और SIR से जुड़े सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।