राज ठाकरे की पार्टी MNS और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन से कल्याण-डोंबिवली नगर निगम का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। इस नगर निगम में 122 सीटें हैं...
महाराष्ट्र में मुंबई के मेयर को लेकर भले ही चर्चा चल रही हो, लेकिन कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा एकनाथ शिंदे की शिवसेना पार्टी को समर्थन देकर पूरा समीकरण बदल दिया है। राज ठाकरे के इस कदम से शिवसेना (UBT) और MNS के बीच भले ही असहजता बढ़ी हो, लेकिन दोनों पार्टियों के रिश्ते नहीं टूटेहैं।।
बता दें कि राज ठाकरे की पार्टी MNS और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन से कल्याण-डोंबिवली नगर निगम का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। इस नगर निगम में 122 सीटें हैं, जिनमें से शिंदे गुट ने 53, बीजेपी ने 50, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 11 और राज ठाकरे की पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की है। बीजेपी और शिंदे गुट ने मिलकर चुनाव लड़ा था।
बता दें कि लॉटरी के अनुसार यहां पर मेयर अनुसूचित जनजाति (ST) का बनेगा। वहीं बीजेपी के पास कोई भी एसटी पार्षद नहीं है; ऐसे में अब शिंदे गुट का मेयर बनने की संभावना चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम चुनाव से पहले ही शुरू हो गया था। नामांकन से पहले बीजेपी ने एमएनएस के कई संभावित उम्मीदवारों को अपने पाले में कर लिया था, जिससे राज ठाकरे की पार्टी कई वार्डों में उम्मीदवार तक खड़े नहीं कर पा रही थी।
उधर, बीजेपी-शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सीट बंटवारे में कई शिवसेना नेताओं को टिकट नहीं मिला। ऐसे नेताओं को एमएनएस ने अपने उम्मीदवार के रूप में उतार दिया। चुनाव प्रचार के दौरान शिवसेना (शिंदे गुट) ने इन उम्मीदवारों को कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक समर्थन दिया, जिसका सीधा असर नतीजों पर पड़ा।
चुनाव के बाद एमएनएस के पांच में से चार पार्षद शिवसेना के संपर्क में आ गए थे, जबकि बीजेपी भी उन्हें तोड़ने की कोशिश में थी। शिवसेना नेता राजेश कदम के मुताबिक, इनमें से तीन पार्षद पहले शिवसेना में रह चुके थे और वापस लौटना चाहते थे। एक अन्य पार्षद को भी बीजेपी के खिलाफ चुनाव में शिवसेना का समर्थन मिला था, जिससे वह शिंदे गुट के करीब था।