US Sanctions:सलमान खान की फिल्म और चाबहार पोर्ट पर विदेश मंत्रालय ने अपना रुख साफ कर दिया है। जानें क्यों चीन को चुभ रही है सलमान की फिल्म और क्या है 2026 की डेडलाइन।
Foreign Ministry: भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में दो बेहद महत्वपूर्ण और अलग-अलग विषयों पर भारत का रुख स्पष्ट किया है। एक तरफ जहां बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की आने वाली फिल्म को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं गर्म हैं, वहीं दूसरी ओर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर भी बड़ी जानकारी सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वह अपनी कूटनीतिक सीमाओं और प्राथमिकताओं को लेकर पूरी तरह सजग है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और सिनेमा जगत में सलमान खान की एक अपकमिंग फिल्म को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, जिसकी कहानी अंतरराष्ट्रीय संबंधों या संवेदनशील विषयों से जुड़ी बताई जा रही है। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को इस तरह की फिल्म की योजना के बारे में जानकारी है।
हालांकि, मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि भारत में फिल्म निर्माण से जुड़े तकनीकी, कानूनी और अनुमति संबंधित मुद्दे संबंधित विभागों (जैसे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय) द्वारा देखे जाते हैं। विदेश मंत्रालय की ऐसी किसी भी फिल्म निर्माण की प्रक्रिया या व्यावसायिक उद्यम में कोई सीधा दखल या भूमिका नहीं होती है।
भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर विदेश मंत्रालय ने एक तकनीकी अपडेट साझा किया है। मंत्रालय ने याद दिलाया कि 28 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक पत्र जारी किया था। इस पत्र में चाबहार पोर्ट के संचालन के लिए दी गई सशर्त प्रतिबंध छूट (Sanctions Waiver) की रूपरेखा बताई गई थी। यह छूट 26 अप्रैल 2026 तक वैध है। भारत सरकार इस समय सीमा और व्यवस्था को लेकर अमेरिकी प्रशासन के साथ निरंतर संपर्क में है। भारत का प्रयास है कि चाबहार बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक होने वाला व्यापार बिना किसी बाधा के जारी रहे।
विदेश मंत्रालय की हालिया ब्रीफिंग के बाद बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की जिस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों बटोरी हैं, वह 'बैटल ऑफ गलवान' (Battle of Galwan) है। इस फिल्म को लेकर न केवल सिनेमा प्रेमियों में उत्साह है, बल्कि इसके विषय ने कूटनीतिक हलकों में भी सरगर्मी बढ़ा दी है।
यह फिल्म सलमान खान के अपने प्रोडक्शन हाउस 'सलमान खान फिल्म्स' (SKF) के बैनर तले बन रही है। फिल्म के हीरो (Lead Actor) स्वयं सलमान खान हैं, जो इस फिल्म में भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी कर्नल बी. संतोष बाबू (महावीर चक्र विजेता) का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में मुख्य अभिनेत्री (Heroine) के तौर पर चित्रांगदा सिंह नजर आएंगी, जो कर्नल संतोष बाबू की पत्नी की भूमिका में होंगी। फिल्म का निर्देशन (Director) अपूर्व लाखिया कर रहे हैं, जिन्हें 'शूटआउट एट लोखंडवाला' जैसी इंटेंस फिल्मों के लिए जाना जाता है।
फिल्म की थीम शुद्ध देशभक्ति और भारतीय सेना के अदम्य साहस पर आधारित है। इसकी कहानी साल 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई उस भीषण झड़प की याद दिलाती है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था।
फिल्म कर्नल बी. संतोष बाबू और उनकी 16 बिहार रेजिमेंट के संघर्ष को दिखाती है। कहानी इस बात पर केंद्रित है कि कैसे भारतीय सैनिकों ने कड़ाके की ठंड और बिना आधुनिक हथियारों (संधि के कारण) के, सिर्फ शारीरिक शक्ति और अदम्य इच्छाशक्ति के दम पर चीनी पीएलए (PLA) के सैनिकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
फिल्म में गलवान की उस काली रात का सजीव चित्रण किया गया है, जब विश्वासघात और साजिश के खिलाफ भारतीय सेना ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
चूंकि फिल्म चीन के साथ संघर्ष को दिखाती है, इसलिए इसे "एंटी-चाइना प्रोपेगेंडा" बताकर विरोध भी हुआ, लेकिन फिल्म की मूल थीम 'देश प्रथम' और भारतीय सीमाओं की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले योद्धाओं को श्रद्धांजलि देना है।
चाबहार के मुद्दे पर भारत की सक्रियता यह दर्शाती है कि वह अपनी ऊर्जा और व्यापारिक सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वे अमेरिका के साथ मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं जो दोनों देशों के हितों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुकूल हो। मंत्रालय इस मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी के बजाय ठोस कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहा है।
सिनेमा विशेषज्ञ: फिल्म जगत के जानकारों का कहना है कि विदेश मंत्रालय का बयान संतुलित है। इससे साफ होता है कि फिल्म की कहानी कूटनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकती है, लेकिन सरकार रचनात्मक स्वतंत्रता में तब तक हस्तक्षेप नहीं करेगी जब तक वह नियमों के दायरे में है।
रणनीतिक विशेषज्ञ: चाबहार पोर्ट पर विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल 2026 की डेडलाइन भारत के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिका के साथ बातचीत का सफल होना भारत के 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' मिशन की सफलता के लिए अनिवार्य है।
चाबहार मामले में भारत जल्द ही एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन भेज सकता है ताकि प्रतिबंधों की छूट को आगे बढ़ाने या इसे स्थाई समाधान में बदलने पर चर्चा की जा सके। वहीं, सलमान खान की फिल्म के मामले में अब सेंसर बोर्ड और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
बहरहाल, चाबहार पोर्ट सिर्फ एक व्यापारिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत-अमेरिका के बढ़ते रिश्तों की एक परीक्षा भी है। जहां अमेरिका ईरान पर दबाव बनाना चाहता है, वहीं भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों और कनेक्टिविटी के लिए ईरान के सहयोग की आवश्यकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस 'डिप्लोमैटिक बैलेंसिंग एक्ट' को कैसे निभाता है।