देश में आखिरी बार जनगणना 2011 में हुई थी। उसके मुताबिक मिज़ोरम की साक्षरता दर 91.3% थी, जो उस समय देश में तीसरे स्थान पर थी। अब यह दर 98.2% तक पहुंच चुकी है, जिससे मिज़ोरम ने शिक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित 95% की सीमा को पार करते हुए "पूर्ण साक्षरता" का दर्जा प्राप्त कर लिया है।
Mizoram declares state fully literate: मिज़ोरम ने भारत के शैक्षिक इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केरल को पछाड़ते हुए, अब मिज़ोरम देश का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए राज्य को इसका प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया।
अब तक केरल साक्षरता के क्षेत्र में देश में शीर्ष स्थान पर रहा है, लेकिन इस बार पूर्वोत्तर के इस छोटे राज्य ने बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए "पूर्ण साक्षर राज्य" का गौरव प्राप्त किया है। मंगलवार को मिज़ोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने आइज़ोल में आयोजित एक समारोह के दौरान राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित किया। इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अपने संबोधन में कहा, "आज हमारे राज्य की यात्रा में यह एक ऐतिहासिक क्षण है, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी… हम इस दिन को किसी अभियान की समाप्ति के रूप में नहीं, बल्कि अवसरों, सशक्तिकरण और समावेशन के एक नए युग की शुरुआत के रूप में मना रहे हैं। हम निरंतर शिक्षा, डिजिटल पहुंच और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से साक्षरता को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।"
देश में आखिरी बार जनगणना 2011 में हुई थी। उसके मुताबिक मिज़ोरम की साक्षरता दर 91.3% थी, जो उस समय देश में तीसरे स्थान पर थी। अब यह दर 98.2% तक पहुंच चुकी है, जिससे मिज़ोरम ने शिक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित 95% की सीमा को पार करते हुए "पूर्ण साक्षरता" का दर्जा प्राप्त कर लिया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, अगस्त-सितंबर 2023 के दौरान राज्यभर में क्लस्टर रिसोर्स सेंटर कोऑर्डिनेटर्स (CRCCs) द्वारा घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वे में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के 3,026 अशिक्षित व्यक्तियों की पहचान की गई। इनमें से 1,692 लोगों को सक्रिय रूप से शिक्षण सत्रों से जोड़ा गया, जिसके चलते यह अभूतपूर्व उपलब्धि संभव हो सकी।
2011 की जनगणना के अनुसार, मिज़ोरम की कुल आबादी लगभग 19.80 लाख थी। वर्तमान समय में यह संख्या बढ़कर लगभग 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। एक नवीनतम अनुमान के अनुसार, देश की कुल साक्षरता दर अब लगभग 85 प्रतिशत हो गई है, जबकि 2011 में यह दर 74.04 प्रतिशत थी।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस दर में अपेक्षित गति से प्रगति न होते देख, जुलाई 2023 में "उल्लास" नामक नव-साक्षरता मिशन की शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत न केवल साक्षरता के नए मानक निर्धारित किए गए, बल्कि राज्यों को इस दिशा में तेज़ी से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित भी किया गया।