
Raj Thackeray Uddhav Thackeray Protest March: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ठाकरे परिवार के दो प्रमुख नेताओं के साथ आने से सियासी हलचल तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च किया जा रहा है।
शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने कहा कि चुनाव आयोग में तीन आयुक्त हैं और हालिया घटनाक्रम को लेकर इनमें से दो आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। देसाई के मुताबिक, इन घटनाक्रमों को लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया गया था।
इस दौरान शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने कहा कि दोनों आयुक्तों ने विशेष रूप से फॉर्म-6 को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि इस व्यवस्था के कारण आम लोगों को बार-बार यह सवाल करने की स्थिति में डाल दिया गया कि उन्हें देश का नागरिक माना जा रहा है या नहीं। इससे लोगों में चिंता और असमंजस पैदा हुआ।
देसाई ने दावा किया कि दोनों आयुक्तों ने इस व्यवस्था को त्रुटिपूर्ण बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी, लेकिन उनकी आपत्तियों और सुझावों को नजरअंदाज कर दिया गया।
शिवसेना सांसद ने कहा कि इन फैसलों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जनता में व्यापक नाराजगी है और इसी गुस्से को आज विरोध मार्च के जरिए सामने रखा जा रहा है।
देसाई के अनुसार, उद्धव बालासाहेब ठाकरे और राज ठाकरे दोनों का मानना है कि मौजूदा हालात के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूरा घटनाक्रम सामने आया है, उसकी जिम्मेदारी स्वीकार की जानी चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि आज देशभर में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, खास तौर पर चुनाव आयोग में भ्रष्टाचार और उसके काम करने के तरीके को लेकर। वे गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से काम कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर पूरे भारत में आक्रोश है। लेकिन जब ‘ठाकरे’ नाम इस आंदोलन से जुड़ता है, तो इस आक्रोश को वास्तविक मजबूती मिलती है और यह आंदोलन गति पकड़ता है।
उन्होंने कहा कि आज दोनों भाई एक साथ यहां मौजूद हैं और ‘चुनाव आयोग हटाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ मजबूती से खड़े हैं। ‘देश बचाओ’ से हमारा मतलब देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाना है। इसी वजह से दोनों भाई आज एक साथ आए हैं। यह एक प्रतीकात्मक कदम है।