
Modi Cabinet Reshuffle: भाजपा में संगठन स्तर पर हुए बदलावों के बाद अब सबकी नजरें कैबिनेट रिशफल पर टिक गई हैं। नितिन नबीन की तरह पीएम मोदी भी अपनी टीम में बदलाव करने वाले हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ ही 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नरेंद्र मोदी अपनी टीम को तैयार करेंगे। माना जा रहा है कि कुछ नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। जबकि कुछ अनुभवी नेताओं की कैबिनेट से विदाई हो सकती है।
हालांकि, अभी ये साफ नहीं है कि कौन कैबिनेट से बाहर होगा, लेकिन बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की 65 सदस्यों वाली नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान से एक अंदाजा जरूर मिल गया है। मौजूदा कैबिनेट में 14 मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालयोें का कार्यभार है, ऐसे में माना जा रहा है कि कुछ मंत्रियोें को सौंपे गए मंत्रालयों की संख्या में भी कमी की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार में इस समय 69 मंत्री हैं, जबकि मंत्रियों की अधिकतम 81 हो सकती है। इस लिहाज से सरकार के पास 12 और पदों को भरने की गुंजाइश है। हालांकि, 12 नए मंत्री बनाए जाएं, इसकी संभावना कम है लेकिन 6-7 नए नाम जुड़ना लगभग तय है। 81 मंत्रियों के कोटे में से कुछ पद भविष्य के लिए बचाकर रखे जा सकते हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के युवा चेहरे अनुराग ठाकुर को सरकार का हिस्सा बनाया जा सकता है। साथ ही यूपी, एमपी, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक को भी मंत्रिमंडल में अच्छा प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों का कहना है कि संभावित फेरबदल में चुनावी ज़रूरतों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, उम्र, कामकाज और बीजेपी के एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत को ध्यान में रखा जा सकता है। इसका मतलब है कि जिन मंत्रियों को नितिन नवीन की टीम में भी बड़ी जिम्मेदारी मिली है, उनकी मोदी कैबिनेट से विदाई हो सकती है। पहले ये अनुमान लगाए जा रहे थे कि केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की पीएम मोदी की टीम में जगह बनी रहेगी, लेकिन अब उनके नाम पर भी सस्पेंस गहराने लगा है।
पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसी तरह, हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी का प्रमुख बनाया गया है। वह सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हैं। पंकज चौधरी भी संगठन स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह यूपी बीजेपी के चीफ हैं और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री भी, ऐसे में अगर एक व्यक्ति, एक पद के सिद्धांत को आधार रखकर कैबिनेट फेरबदल किया जाता है, तो उनकी विदाई संभव है। पर एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनावों को देखते हुए वह अभी मंत्रिमंडल का हिस्सा बने रह सकते हैं।
इनके अलावा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को भी मोदी कैबिनेट से बाहर होना पड़ सकता है, लेकिन इसकी वजह दूसरी है। दरअसल, पुरी का राज्य सभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है और उन्हें दोबारा राज्य सभा भेजने को लेकर अब तक कोई सुगबुगाहट नहीं है। ऐसी स्थिति में पेट्रोलियम मंत्रालय की कमान किसी और को सौंपने की संभावना बढ़ गई है। बतौर पेट्रोलियम मंत्री पुरी के कामकाज से पीएम मोदी भले ही खुश हों, लेकिन जनता में उन्हें लेकर नाराजगी है। खासकर एथेनॉल के मुद्दे ने पुरी और नितिन गडकरी दोनों के खिलाफ व्यापक माहौल बनाया है। ऐसे में अगर हरदीप पुरी कैबिनेट से जाते हैं, तो सरकार को पब्लिक सेंटीमेंट को साधने में कुछ हद तक सफलता मिल सकती है।
कैबिनेट फेरबदल को लेकर सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की कुर्सी को भी खतरा है? पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर देश में गुस्सा है। सोशल मीडिया एथेनॉल संबंधी शिकायतों को लेकर पटा पड़ा है। एक्टिविस्ट तेहसीन पूनावाल बाकायदा इसे लेकर अभियान चला रहे हैं और उन्हें जनता का सपोर्ट भी मिल रहा है। इस मुद्दे को लेकर नितिन गडकरी के खिलाफ लोगों में सबसे ज्यादा नाराजगी है, फिर भले ही यह सीधे तौर पर उनके मंत्रालय से जुड़ा मामला न हो।
गडकरी का इस हद तक विरोध हो रहा है कि उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा है। सरकार के किसी मंत्री के विरोध का असर सरकार की छवि पर भी पड़ता है, तो क्या इस फेरबदल में नितिन गडकरी का पोर्टफोलियो बदला जा सकता है या उन्हें कुछ वक्त के लिए आराम दिया जा सकता है? ये सवाल सबसे ज्यादा पूछे जा रहे हैं।
हालांकि, राजनीति के जानकारों का कहना है कि सरकार गडकरी को मंत्रिमंडल फेरबदल से दूर ही रखेगी, क्योंकि मौजूदा हालात में यदि उनका मंत्रालय बदला जाता है या फिर फिर कैबिनेट से बाहर किया जाता है, तो गलत संदेश जाएगा। इसके अलावा, गडकरी संघ के पसंदीदा नेता हैं, ये भी उनकी पोजीशन को मजबूत बनाता है।
मोदी कैबिनेट में नए चेहरे के तौर पर महाराष्ट्र से श्रीकांत शिंदे का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। श्रीकांत, एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद हैं। भाजपा महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ रिश्ते बेहतर बनाने के लिए श्रीकांत को मंत्री पद दे सकती है। महाराष्ट्र के पिछले विधानसभा चुनाव के बाद से भाजपा और शिंदे में मनमुटाव खुलकर सामने आए हैं। शिंदे दोबारा सीएम बनना चाहते थे, लेकिन भाजपा ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें उप-मुख्यमंत्री का पद दिया। ऐसे में बीजेपी के पास कैबिनेट फेरबदल उस मनमुटाव और नाराजगी को दूर करने का एक मौका है।