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National Teacher Awardee 2026: बंकर को लैब, क्लास को बनाया संसद, ‘कमाल’ है मोहम्मद मुस्तफा की टीचिंग

National Teacher Award 2026: कारगिल के शिक्षक मोहम्मद मुस्तफा कमाल ने शिक्षा को रोचक और व्यावहारिक बनाने की अनूठी पहल की। सेना के पुराने बंकरों को प्रयोगशाला और कक्षा को मॉडल संसद में बदलकर उन्होंने बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि बढ़ाई। उनके नवाचारों और समर्पण को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है।
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Sep 05, 2026
Mohammad Mustafa Kamal teacher award
मोहम्मद मुस्तफा कमाल (Photo-X @KamaalSince85)

Mohammad Mustafa Kamal: हाथ में किताबें, दिल में क्रिकेट और गोलीबारी का शोर... मोहम्मद मुस्तफा कमाल ने जिंदगी के कई रंग देखे। कुछ बेहद डरवाने, कुछ मायूस करने वाले और कुछ यह समझाने वाले की जिंदगी समझौते का नाम है। हालांकि, समझौते के साथ जिंदगी को कैसे सार्थक और खुशहाल बनाया जा सकता है, इस एक फलसफे ने उन्हें कारगिल के छोटे से गांव से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद की। मोहम्मद मुस्तफा कमाल को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है और वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह पुरस्कार प्राप्त करेंगे।

कारगिल युद्ध के दौरान जब भारतीय सेना पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम कर रही थी। तब मोहम्मद मुस्तफा कमाल गोलियों के शोर के बीच किताबों में मन लगाने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, उनका दिल क्रिकेट के मैदान पर ज्यादा लगता, वह देश के लिए खेलना चाहते थे। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी की वह महंगे क्लब का हिस्सा बन सकें। इसलिए उन्होंने पढ़ाई पर फोकस किया, आग उगलती बंदूकों को अपनी प्रेरणा बनाया – अशिक्षा रूपी शत्रु का खात्मे के लिए। पढ़े, खूब पढ़े और पढ़-लिखकर, पढ़ाने का ही पेशा चुना और बने शिक्षक। आज उनकी इनोवेटिव टीचिंग घाटी के बच्चों का भविष्य संवार रही है। 

ऐसे बदला शिक्षा का तरीका

कारगिल के गांव पाश्कुम से आने वाले 41 वर्षीय मोहम्मद मुस्तफा कमाल सीमावर्ती क्षेत्र में बच्चों की पढ़ाई को अधिक रोचक और प्रभावी बनाने में लगे हैं। इसके लिए उन्होंने सेना के खाली पड़े बंकरों को प्रयोगशाला में तब्दील कर दिया और कक्षाओं को मॉडल संसद बनाया। मुस्तफा ने 2021 में पाश्कुम के राजकीय मॉडल मिडिल स्कूल में क्लास 6 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया था। इस दौरान, एक दिन उनकी नजर स्कूल परिसर में कुछ जर्जर सैन्य बंकरों पर गई, जिन्हें करगिल युद्ध के दौरान बनाया गया था। उन्होंने सोचा कि क्यों न इन बंकरों का इस्तेमाल बच्चों की भलाई के लिए किया जाए। गुफा जैसे इन बंकरों को प्रयोगशाला यानी लैब में बदल दिया। इसका उद्देश स्टूडेंट्स को यह समझाना और अहसास दिलाना था कि प्राचीन काल में लोग गुफाओं में किस तरह रहते थे और उनका दैनिक जीवन कैसा हुआ करता था।

उनका ये प्रयोग हिट रहा, छात्रों की भागीदारी बढ़ने लगी और वे विषय को रटने के बजाए उसे समझने और उसमें रुचि लेने लगे हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी इनोवेटिव टीचिंग में एक और अध्याय जोड़ा। स्टूडेंट्स को नागरिक शास्त्र पढ़ाने के लिए मुस्तफा ने क्लास के सिटिंग अरेंजमेंट को बदलकर उसे संसद जैसा रूप दिया। छात्रों को सत्तापक्ष और विपक्ष में बांटा गया। खुद स्पीकर की भूमिका में आए। बच्चों को समसामयिक मुद्दों पर बहस करने का मंच उपलब्ध कराया गया। इससे वे आसानी से समझ पाए कि राष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र किस तरह काम करता है।

बच्चों को इतिहास से जोड़ा

मोहम्मद मुस्तफा कमाल ने ग्रेट बाथ लूडो (Great Bath Ludo) नामक एक खेल भी शुरू किया, जो मोहनजोदड़ो पर आधारित था। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य शैक्षणिक खेलों को भी पढ़ाई का हिस्सा बनाया। इन खेलों के माध्यम से वे छात्रों का आकलन करते और उन्हें तनाव मुक्त होकर पढ़ने के लिए प्रेरित करते। मुस्तफा ने स्टूडेंट्स को आसपास मौजूद अलग-अलग प्रकार के पत्थरों और प्राचीन बर्तनों पर भी गौर करने को कहा।

बच्चे पुराने और अप्रचलित बर्तनों को खोजते, उन्हें लेकर आते और मुस्तफा से उनके बारे में समझते। इस तरह, प्राचीन बर्तन और मटके कक्षा की शोभा बढ़ाने लगे और बच्चों में इतिहास के प्रति रुचि विकसित हुई। मुस्तफा बताते हैं कि दो छात्रों से जुड़े अनुभव उनके दिल के बेहद करीब हैं। क्योंकि इससे उन्हें लगता है कि वह अपने उद्देश्य में सफल हुए हैं। पहला - जब उनके मिडिल स्कूल के एक छात्र ने इतिहास को “प्रैक्टिकल” विषय बताया। आमतौर पर प्रैक्टिकल शब्द का इस्तेमाल साइंस और कॉमर्स जैसे विषयों के लिए किया जाता है। मुस्तफा के लिए छात्र की यह टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण थी।

यह इस बात का प्रमाण थी कि छात्र इतिहास को केवल रटने के बजाए उसे अनुभव कर रहे हैं। दूसरा - बंकर को प्रयोगशाला में बदलने के बाद मुस्तफा बच्चों को पढ़ा रहे थे। तभी एक छोटा बच्चा हाथ में कटोरे के आकार का पत्थर लिए उत्साह से उनकी ओर दौड़ता हुआ आया। बच्चे ने बताया कि उसे एक अनोखा पत्थर मिला है। मुस्तफा ने कहा – वो पत्थर आज भी मेरे घर में रखा है। यह एक अनमोल याद है कि इतनी कम उम्र का छात्र भी कितना जिज्ञासु हो सकता है।

सोनम वांगचुक ने किया प्रेरित

मुस्तफा को 2016 में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से मिलने का मौका मिला। दरअसल, मुस्तफा ने लद्दाख टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में 10 साल काम किया। यह शिक्षा विभाग की समान विचारधारा वाले शिक्षकों को साथ लाने की एक पहल थी। इसी के सिलसिले में उनका सोनम वांगचुक से मिलना हुआ और इस मुलाकात ने उन्हें भविष्य के लिए नई ऊर्जा, उमंग और विचारों से भर दिया। वांगचुक से उन्होंने सीखा कि बड़े और आकर्षक लगने वाले कदम उठाने के बजाए छोटी और व्यावहारिक परियोजनाओं पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

मुस्तफा के नेतृत्व में एसोसिएशन ने लद्दाख के दो मिडिल स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर काम किया और परिणाम चौंकाने वाले रहे। इसके अलावा, करगिल के एक स्कूल ने दो राष्ट्रीय पुरस्कार जीते। मुस्तफा को उनके शैक्षणिक कार्यों के लिए लद्दाख राज्य पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया। आज मोहम्मद मुस्तफा कमाल की इनोवेटिव टीचिंग की गूंज सीमाओं के बंधन को तोड़ते हुए पूरे देश में सुनाई दे रही है।

बच्चों को किताबी ज्ञान में न बांधें

मुस्तफा का मानना है कि शिक्षकों को AI से लैस करना बेहद जरूरी है। तकनीकी दुनिया तेजी से बदल रही है, ऐसे में शिक्षकों को छात्रों से भी अधिक जागरूक होने की जरूरत है। उनका कहना है कि यह शिक्षकों की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे छात्रों में निवेश करें, उन्हें निखारें और उन्हें इस बारे में उचित मार्गदर्शन दें कि वे वास्तव में क्या हासिल करना चाहते हैं। मुस्तफा के अनुसार, अगर हम चाहते हैं कि लद्दाख से वांगचुक जैसे और इनोवेटर सामने आएं, तो हमें छात्रों को उनकी अपनी राह तलाशने और उस पर आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए। इसके बजाए कि उन्हें किताबी ज्ञान रटाया जाए और परंपरागत रास्तों पर चलने के लिए कहा जाए।

शिक्षा के क्षेत्र में मुस्तफा का योगदान अब केवल घाटी तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने एनसीईआरटी से जुड़े शैक्षणिक कार्यों में भी योगदान दिया है। इसके अलावा, उन्होंने करगिल के ग्रामीण सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाने के लिए स्थानीय समुदायों और स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के साथ मिलकर काम किया है। हाल ही में उन्हें केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के स्कूल शिक्षा विभाग में इतिहास के प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया गया है।

Updated on:
05 Sept 2026 01:30 pm
Published on:
05 Sept 2026 01:03 pm
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