
ईसाई संगठनों ने रोकी हाउस प्रेयर (सांकेतिक फोटो-IANS)
West Bengal News : कोलकाता। पश्चिम बंगाल के कई जिलों में ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाओं और धार्मिक गतिविधियों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रार्थना सभाओं पर कथित हमलों की घटनाओं के बाद कई ईसाई संगठनों ने घरों में होने वाली प्रार्थना सभाएं और लोगों के घरों में धार्मिक यात्राएं फिलहाल रोक दी हैं। हावड़ा के उलूबेरिया में 23 अगस्त को एक घर में चल रही प्रार्थना सभा में कथित तौर पर भीड़ के घुसने और लोगों के साथ मारपीट का मामला सामने आया था। पुलिस ने पादरी और सभा में शामिल लोगों को मौके से निकालकर अस्पताल पहुंचाया था।
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 अगस्त को उलूबेरिया में एक घर में रविवार की प्रार्थना सभा चल रही थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक भीड़ घर के अंदर प्रवेश करती दिखाई दे रही है। आरोप है कि भीड़ ने सभा में शामिल लोगों पर 'जबरन धर्म परिवर्तन' का आरोप लगाते हुए उनके साथ मारपीट की और घर में तोड़फोड़ की। पादरी मिथुन हाजरा ने को बताया कि हर रविवार की तरह उस दिन भी करीब 60 लोगों के लिए एक मकान किराए पर लिया गया था।
सुबह करीब 11 बजे प्रार्थना शुरू हुई। दोपहर करीब तीन बजे नारे लगाती भीड़ वहां पहुंची और कथित तौर पर उनके साथ तथा अन्य लोगों के साथ मारपीट की। पादरी के अनुसार, भीड़ ने साउंड सिस्टम, पोडियम, मेज-कुर्सियां और पंखे तक तोड़ दिए। पुरुषों और महिलाओं के साथ भी मारपीट का आरोप है। बाद में पुलिस ने उन्हें वहां से निकालकर अस्पताल पहुंचाया। इलाज के बाद पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई। पादरी ने कहा कि घटना के बाद से इलाके में हाउस प्रेयर बंद कर दी गई है। हावड़ा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने बताया कि मामले में एफआइआर दर्ज कर जांच की जा रही है। हालांकि, इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगीय क्रिश्चियन परिषद के संस्थापक हेरोड मुलिक ने कहा कि उलूबेरिया की घटना कोई अकेली घटना नहीं है। उनके अनुसार हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं और संगठन पीड़ितों को कानूनी मदद उपलब्ध करा रहा है। मुलिक ने दावा किया कि 30 अगस्त को भी हावड़ा के जगतबल्लवपुर और उत्तर 24 परगना के हिंगलगंज में हाउस प्रेयर के दौरान घटनाएं सामने आईं।
25 अगस्त को हावड़ा के घुसुड़ी इलाके में एक घर में प्रार्थना सभा के दौरान कथित हमले की घटना सामने आई। चर्च ऑफ द ग्रेस के फादर सूरज सरोज ने आरोप लगाया कि समुदाय के कुछ लोगों के साथ मारपीट की गई और कुछ लोग घायल हुए।
26 अगस्त को पूर्व मेदिनीपुर के चेक माइलपोस्ट गांव में भी घर पर प्रार्थना सभा के दौरान ऐसी ही घटना का आरोप लगाया गया। पादरी और उनकी पत्नी के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें स्थानीय पुलिस थाने ले जाया गया।
14 अगस्त को पूर्व बर्धमान जिले के सहानगर स्थित सेंट क्लेरेट चर्च में एक अंतिम संस्कार के दौरान विवाद की घटना सामने आई। चर्च के प्रभारी पादरी फादर सैमुअल हेम्ब्रम के अनुसार, भीड़ ने कब्रिस्तान के दस्तावेज दिखाने की मांग की।
उन्होंने बताया कि शव को कब्र में उतार दिया गया था, लेकिन भीड़ ने अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी। आरोप है कि शव को कब्र से बाहर निकालना पड़ा और बाद में उसे बर्धमान शहर के दूसरे कब्रिस्तान में दफनाया गया। पादरी ने पुलिस अधीक्षक और प्रखंड विकास अधिकारी को ई-मेल के जरिए शिकायत भेजने की बात कही है।
वहीं पूर्व बर्धमान की पुलिस अधीक्षक पुष्पा ने कहा कि मृत महिला उस क्षेत्र की निवासी नहीं थी, इसलिए स्थानीय लोगों ने अंतिम संस्कार का विरोध किया। स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि जिस जमीन पर अंतिम संस्कार किया जा रहा था, वह कब्रिस्तान नहीं बल्कि निजी जमीन है। पुलिस जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
मातम में शामिल लोगों के साथ मारपीट के आरोप पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि मारपीट हुई थी, हालांकि स्थानीय पुलिस से इसकी जानकारी ली जाएगी। उनके अनुसार उस समय कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई थी और पुलिस की प्राथमिकता उसे नियंत्रित करना था।
हमलों के आरोपों के बीच हिंदू दक्षिणपंथी संगठन सिंघा वाहिनी के अध्यक्ष देबदत्ता माझी ने कहा कि उलूबेरिया और अन्य स्थानों पर पैसे का लालच देकर जबरन धर्म परिवर्तन कराने की शिकायतें हैं। उन्होंने कहा कि संगठन इसका विरोध कर रहा है और इसे जारी नहीं रहने दिया जा सकता।
पश्चिम बंगाल के जनजातीय विकास एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री क्षुदीराम टुडू ने कहा कि प्रार्थना करना धार्मिक स्वतंत्रता का विषय है और सरकार किसी की निजी आस्था में हस्तक्षेप नहीं करती। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि जबरन धर्म परिवर्तन हो रहा है तो कानून अपना काम करेगा और किसी भी व्यक्ति को शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है।
सीपीआइ(एम) के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि लोगों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है और उनकी पार्टी बंगाल में इस अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता प्रदीप्ता मुखर्जी ने भाजपा पर 'डर की राजनीति' करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब यह उनकी राजनीति का हिस्सा बन गया है कि मुसलमानों को विदेशी बताने और ईसाई समुदाय के लोगों के घरों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं भाजपा के राज्यसभा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि वह इस मामले पर टिप्पणी नहीं करना चाहते, क्योंकि उन्हें ऐसी घटनाओं की जानकारी नहीं है।
Updated on:
05 Sept 2026 12:58 pm
Published on:
05 Sept 2026 12:49 pm
