
KC Venugopal on RSS: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में गुरुवार को Gen Z और Gen अल्फा से संवाद किया। अब इसको लेकर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार को तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि उनमें युवाओं के प्रति वास्तव में ईमानदारी है, तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा मांगना चाहिए। वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि RSS प्रभावी रूप से सरकार को नियंत्रित करता है, इसलिए छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई हालिया पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी भी उसे लेनी चाहिए।
केसी वेणुगोपाल ने मीडिया को दिए बयान में कहा, 'आरएसएस सरकार को नियंत्रित कर रहा है। यदि मोहन भागवत में Gen Z के प्रति कोई ईमानदारी है, तो वे गृह मंत्री से इस्तीफा मांगें। अगर ऐसा नहीं कर सकते, तो कम से कम संसद में आकर छात्रों और प्रधानमंत्री से भी माफी मांगें। यदि उन्हें छात्रों की सच में चिंता है, तो उनके खिलाफ हुए अत्याचारों, पेलेट गन के इस्तेमाल और लाठीचार्ज पर विचार करना चाहिए। इस पर वे चुप क्यों हैं? यह सब केवल दिखावा है।'
कांग्रेस की ओर से छात्रों के समर्थन को दोहराते हुए केसी वेणुगोपाल ने कहा, 'जहां भी छात्र वास्तविक मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण और उचित विरोध करेंगे, हम उनके साथ खड़े रहेंगे।'
सरकार पर संसदीय परंपराओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, 'एफसीआरए विधेयक का हम जोरदार विरोध करेंगे। जब सदन व्यवस्थित ढंग से नहीं चल रहा हो, तब सरकार इस तरह के विधेयक को जबरन पारित नहीं करा सकती।'
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA) को मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में दोबारा पेश किया गया है। इसका उद्देश्य विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन कर विदेशी चंदे के नियमन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है।
Gen Z और Gen अल्फा से संवाद में सवालों का जवाब देते हुए मोहन भागवत ने हालिया छात्र आंदोलनों और सरकार की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में सहमति बनाने के लिए विरोध-प्रदर्शन भी एक तरीका है। कई विचार मिलते हैं और चर्चा के बाद सहमति बनती है। यदि किसी कारण से बात नहीं सुनी जाती, तो आंदोलन किया जा सकता है। लेकिन आंदोलन का उद्देश्य सहमति बनाना होना चाहिए, समाज में विभाजन पैदा करना नहीं। जहां तक Gen Z का सवाल है, हाल में जो हुआ, उनकी शिकायतें वास्तविक हैं। भारत की शिक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है, जो नहीं हो रहा है। इसलिए वे अपनी बात उठा रहे हैं। इस पर संवाद होना चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगा कि Gen Z को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध के भी तरीके होते हैं। संविधान निर्माताओं, खासकर डॉ. भीमराव आंबेडकर के भाषणों में इसके संकेत मिलते हैं। हमें यह भी समझना चाहिए कि Gen Z केवल विरोध के लिए आवाज नहीं उठा रही है, बल्कि उनके सामने वास्तविक समस्याएं हैं, जिनका समाधान होना चाहिए। आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए होना चाहिए।'