
राहुल गांधी (फाइल फोटो - आईएएनएस)
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्ष के सीधे निशाने पर हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी उन पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने वीडियो जारी करते हुए कहा कि वोट चोरी भारतीय लोगों के खिलाफ एक अपराध है। यह साफ तौर पर संविधान पर हमला है।
विपक्ष के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के आधार पर निशाना बनाया। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं के फैसलों पर कई बार आपत्ति जताई थी।
X पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि वोट चोरी भारतीय लोगों के ख़िलाफ़ अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। BJP, RSS और EC, जिन्होंने इसे अंजाम दिया, उन्होंने देशद्रोह का काम किया है। न्याय जरूर होगा। राहुल ने कहा कि मैं चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारियों से साफ-साफ कह रहा हूं। आप जो कर रहे हैं, वह गलत है। यह देशद्रोह है, यह देश के खिलाफ है। इसे भूलिए मत। समय आएगा! हम आपको पकड़ेंगे! आपको बख़्शा नहीं जाएगा।
कांग्रेस नेता व देश के पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने भी इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर रिपोर्ट सही है, तो इससे चुनाव आयोग के फैसलों और फैसला लेने की प्रक्रिया, दोनों पर सवाल उठते हैं। चिदंबरम ने मांग की कि हाल के वर्षों में ECI के फैसलों की संसदीय समिति से समीक्षा कराई जाए और SIR प्रक्रिया को रोका जाए।
इसी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि पूरे SIR अभ्यास की वैधानिकता की समीक्षा जरूरी है। तिवारी ने इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यदि दो चुनाव आयुक्त लगातार फैसलों पर आपत्ति दर्ज कर रहे थे और इसके बावजूद वही प्रक्रियाएं आगे बढ़ती रहीं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आयोग में निर्णय आखिर किस प्रक्रिया के तहत लिए जा रहे थे। उन्होंने इसे आयोग के बाहर किसी प्रभाव की आशंका से भी जोड़ा, हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है, स्थापित तथ्य नहीं।
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने, नाम बहाल करने, अपील और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे अहम विषयों से था।
EC सूत्रों का कहना है कि दोनों आयुक्तों ने केवल कुछ मामलों पर अपनी टिप्पणियां दी थी, जिन्हें आयोग ने विचार में लिया। रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने मीडिया को बताया कि SIR से जुड़े फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए थे।
Updated on:
23 Sept 2026 01:25 pm
Published on:
23 Sept 2026 01:25 pm
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