राष्ट्रीय

एवेरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान डेथ जोन हुई थी माउंटेनियर की मौत, परिवार ने कहा- बॉडी वहां से लाना ठीक नहीं, वजह भी बताई

Mountaineer Arun Kumar Tiwari Death: 53 साल के माउंटेनियर अरुण कुमार तिवारी के परिवार का कहना है कि उनकी डेड बॉडी एवरेस्ट से नहीं लाएंगे, क्योंकि उन्हें वो जगह पसंद थी। अब वह हिमालय की गोद में सोएंगे।
2 min read
• •
Updated: 27 May 2026, 6:00 PM IST
Mountaineer Arun Kumar Tiwari Death
53 साल के माउंटेनियर अरुण कुमार तिवारी की एवेरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान हई थी मौत (सोर्स: ANI)

Mount Everest Death Zone: एवरेस्ट… दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, जहां पहुंचना हर पर्वतारोही का सपना होता है। लेकिन यही पहाड़ कई बार जिंदगी की आखिरी मंजिल भी बन जाता है। हैदराबाद के 53 वर्षीय माउंटेनियर अरुण कुमार तिवारी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। आईटी प्रोफेशनल होने के बावजूद उनका असली जुनून पहाड़ों पर चढ़ाई करना था। पिछले 20 वर्षों में उन्होंने किलिमंजारो, डेनाली, कंचनजंगा जैसी खतरनाक चोटियों को फतह किया और फिर अपनी सबसे बड़ी चुनौती माउंट एवरेस्ट की ओर बढ़े।

अरुण ने पिछले साल एवरेस्ट पर चढ़ाई करने की कोशिश की थी, लेकिन वह असफल हो गए थे। इसके बाद उन्होंने एवरेस्ट को जीतने का पूरा मन बना लिया था। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। एवरेस्ट के डेथ जोन में उनकी मौत हो गई।

पार्थिव शरीर एवरेस्ट की बर्फीली वादियों में छोड़ देना चाहिए: अरुण कुमार तिवारी का परिवार

माउंटेनियर अरुण कुमार तिवारी

आमतौर पर परिवार अपने प्रियजन की पार्थिव शरीर घर लाना चाहता है, लेकिन अरुण के परिवार ने एक अलग फैसला लिया। उनका कहना है कि जिस हिमालय से अरुण सबसे ज्यादा प्यार करते थे, अब वही उनकी अंतिम और सबसे पसंदीदा जगह है। जहां वह हमेशा सुकून से सो सकते हैं। परिवार के मुताबिक, एवरेस्ट की बर्फीली वादियों में उन्हें छोड़ देना ही उनके सपनों और जुनून का सबसे सच्चा सम्मान है।

एवरेस्ट से उतरते समय दो भारतीय पर्वतारोहियों की हो गई थी मौत

बता दें माउंट एवरेस्ट से उतरते समय दो भारतीय पर्वतारोहियों, अरुण कुमार तिवारी और संदीप आरे की मौत हो गई थी। अभियान आयोजित करने वाली कंपनी पायनियर एडवेंचर्स के मुताबिक, अरुण कुमार तिवारी की तबीयत उतरने के दौरान बिगड़ गई थी। वह एवरेस्ट के शिखर के पास स्थित हिलेरी स्टेप इलाके में बीमार पड़े, जहां चार शेरपा उनकी मदद कर रहे थे। माना जा रहा है कि वह हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडिमा (HAPE) नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जो ज्यादा ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी से होती है।

इस साल नेपाल में एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए रिकॉर्ड संख्या में लोग पहुंचे हैं। सिर्फ एक दिन में 274 पर्वतारोहियों ने शिखर पर पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया। रिपोर्ट्स के अनुसार, एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने के रास्ते में करीब पांच किलोमीटर लंबी लाइन लग गई थी।

नेपाल सरकार ने इस सीजन में एवरेस्ट के लिए 495 परमिट जारी किए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। भारत से 61 पर्वतारोहियों को परमिट मिले, जिससे भारत इस सीजन में तीसरा सबसे बड़ा समूह बना। चीन 109 और अमेरिका 77 परमिट के साथ पहले और दूसरे स्थान पर रहे।

नेपाल की अर्थव्यवस्था में भी पर्वतारोहण का बड़ा योगदान रहा। इस सीजन में 30 चोटियों के जरिए नेपाल ने 1.24 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा की कमाई की, जिसमें अकेले एवरेस्ट से 1.07 अरब रुपये का राजस्व मिला।

Updated on:
27 May 2026, 6:00 PM IST
Published on: