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मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति नीति कोर्ट की निगरानी में? सरकार से 4 हफ्ते में स्पष्टीकरण तलब

Temple Priest Appointment Policy: मध्य प्रदेश के सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति से जुड़ी 2019 की नीति को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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Jul 31, 2026
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मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति नीति कोर्ट की निगरानी में? फोटो सोर्स- वीडियो ग्रैब

Temple Priest Appointment Policy: मध्य प्रदेश सरकार के नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए बनाई गई साल 2019 की नीति अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है। इस नीति को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति प्रक्रिया में केवल ब्राह्मण समुदाय को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के योग्य अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिल रहा। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में जवाब तलब किया है।

हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस

इस मामले की सुनवाई गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच में हुई। दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

2019 की पुजारी नियुक्ति नीति को दी गई चुनौती

यह जनहित याचिका अजाक्स, भोपाल के सचिव एम.सी. अहिरवार की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने 4 फरवरी 2019 को सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए एक नीति लागू की थी। याचिकाकर्ता ने इसी नीति और उसके आधार पर की जा रही नियुक्तियों को न्यायालय में चुनौती दी है।

जाति के आधार पर भेदभाव का लगाया आरोप

याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान नियुक्ति प्रक्रिया में केवल ब्राह्मण समुदाय के लोगों को पुजारी बनने का अवसर दिया जा रहा है। इसके चलते एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के योग्य उम्मीदवार इस प्रक्रिया से बाहर रह जाते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि जाति के आधार पर किसी वर्ग को अवसर से वंचित करना संविधान में दिए गए समानता के अधिकार के विपरीत है। इसलिए इस नीति की संवैधानिक वैधता की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष

13 मई 2025 को दायर इस जनहित याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और अधिवक्ता अभिलाषा लोधी ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा। दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार सहित संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

सरकार को स्पष्ट करनी होगी नियुक्ति नीति

अब राज्य सरकार को हाईकोर्ट के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के लिए वर्तमान नियम और पात्रता क्या हैं। साथ ही यह भी बताना होगा कि विभिन्न सामाजिक वर्गों की पात्रता तय करने का आधार क्या है।

अगली सुनवाई में तय हो सकते हैं अहम कानूनी सवाल

मामले की आगामी सुनवाई में यह महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न भी सामने आ सकता है कि सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति जाति के आधार पर की जा सकती है या फिर इसके लिए धार्मिक ज्ञान, योग्यता और निर्धारित पात्रता ही आधार होनी चाहिए। हाईकोर्ट के समक्ष राज्य सरकार के जवाब के बाद इस मामले में आगे की सुनवाई होगी, जिस पर सभी पक्षों की नजर बनी हुई है।

Updated on:
31 Jul 2026 06:19 pm
Published on:
31 Jul 2026 06:19 pm