
नई दिल्ली। कर्नाटक में बच्चों में बढ़ते वायरस फीवर के केसेज के चलते लोगों की चिंता बढ़ रही है। बुखार के इन केसेज में टेस्ट कराए जाने पर कोविड और डेंगू के टेस्ट भी नेगेटिव आ रहे हैं, ऐसे में मेडिकल एक्सपर्ट अंदाजा लगा रहे हैं यह रहस्यमयी बुखार वायरस में होने वाले अप्रत्याशित म्यूटेशन का नतीजा हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रहस्यमयी रूप से फैल रहे इस बुखार के कारण शरीर में कई प्रकार की बीमारियां हो रही हैं। हालांकि डॉक्टर कह रहे हैं कि इस बुखार से डरने की जरूरत नहीं है और जब तक कोई असामान्य लक्षण न दिखाई दें तब तक अनावश्यक टेस्ट भी करवाने की जरूत नहीं है।
अभी एक दिन से लेकर पांच वर्ष की उम्र तक के बच्चों में इस तरह का बुखार सर्वाधिक देखा जा रहा है। इसमें बहुत तीव्र बुखार, खांसी, सर्दी, उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं परन्तु सीजनल इन्फेक्शन जैसे H1N1 या चिकनगुनिया, डेंगू और कोविड की जांच करवाने पर ये टेस्ट नेगेटिव आ रहा है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार संभव है कि पुराने वायरस में म्यूटेशन होने की वजह से ऐसे लक्षण दिखाई दे रहे हों और टेस्ट नेगेटिव आ रहा है। उनके अनुसार यदि बच्चों को सही समय पर उपचार मिल जाए तो एक सामान्य बीमारी की तरह ही इसका इलाज किया जा सकता है।
डॉक्टर के अनुसार यह बीमारी कुछ खास जगहों पर ही फैल रही है। इसमें तीन दिन या इससे अधिक समय के लिए बुखार आ रहा है और कुछ खास लक्षण दिखाई दे रहे हैं। वे कहते हैं कि कई बार बच्चों में शरीर नीला पड़ना, श्वांस में दिक्कत होना, तेज बुखार की वजह से कुछ भी न खाना, स्किन पर रैशेज होना जैसे लक्षण भी दिखाई पड़ रहे हैं। इन लक्षणों के दिखाई देने पर बच्चों को डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए।