
Mysuru Dasara Nandi Dhwaja Puja Controversy: कर्नाटक के मैसूरु दशहरा समारोह के दौरान नंदी ध्वज पूजा में तीन मंत्रियों को प्रवेश से रोके जाने पर विवाद बढ़ गया है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने गुरुवार को इस घटना को जातिगत रंग देने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं और इस मामले का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश से वीडियो फुटेज की जांच कर मामले की पड़ताल करने और रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
जी. परमेश्वर ने बुधवार को जम्बू सवारी जुलूस के दौरान मैसूर पैलेस परिसर में हुई घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने इसका वीडियो देखा है। उनके मुताबिक, पुलिस अधिकारी ने मंत्रियों को बिना किसी मारपीट के प्रवेश करने से रोका था। परमेश्वर ने कहा कि संबंधित अधिकारी को पता था कि वे मंत्री हैं, लेकिन संभव है कि उसे केवल मुख्यमंत्री को ही अंदर जाने देने का निर्देश मिला हो। उन्होंने सवाल किया कि यदि पुलिस को मुख्यमंत्री के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को प्रवेश नहीं देने के लिए कहा गया है, तो वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने में क्या गलत है। उन्होंने इस घटना को प्रोटोकॉल से जुड़ा मामला बताते हुए कहा कि इसे अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने तीनों मंत्रियों को बार-बार 'दलित मंत्री' कहे जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि उन्हें केवल मंत्री कहने के बजाय उनकी जाति के आधार पर क्यों संबोधित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि क्या अन्य मंत्रियों को भी उनकी जाति के नाम से संबोधित किया जाएगा। परमेश्वर के मुताबिक, भारतीय समाज में अलग-अलग सामाजिक वर्ग और स्तर मौजूद हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल विवाद पैदा करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दशहरा जैसे बड़े आयोजन के दौरान हुई छोटी-मोटी घटनाओं को जातिगत रंग देना अनुचित है। उन्होंने राजनीतिक दलों से भी इस मामले का इस्तेमाल अपने उद्देश्यों के लिए नहीं करने की अपील की।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि मंत्रियों को नंदी ध्वज पूजा में भाग लेने दिया जाए। उन्होंने बताया कि मैसूरु जिला प्रभारी मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया अकेले सभी जिम्मेदारियां नहीं संभाल सकते थे, इसलिए उन्होंने दूसरे मंत्रियों को भी आयोजन से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी थीं। शिवकुमार ने कहा कि सभी मंत्री उनकी टीम का हिस्सा हैं और उन्हें पूजा में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए था। उनके मुताबिक, उन्हें वापस जाकर मंत्रियों को अंदर लाना पड़ा। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रियों को पूजा स्थल में प्रवेश करने से रोकना अहंकारपूर्ण रवैया था।
डीके शिवकुमार ने गुरुवार को मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को घटना की जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। जांच में बुधवार को मैसूर पैलेस परिसर में हुई घटना और मंत्रियों को प्रवेश से रोके जाने की परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी। इस मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि पुलिस अधिकारियों को मंत्रियों को प्रवेश नहीं देने का निर्देश किसने दिया था। जांच के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बुधवार को नंदी ध्वज पूजा के दौरान मंत्रियों शिवराज तंगडगी, पीएम नरेंद्र स्वामी और केएस बसवंतप्पा को पुलिसकर्मियों ने पूजा स्थल में प्रवेश करने से रोक दिया था। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया।घटना के बाद मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप किया और पुलिस को मंत्रियों को पूजा में शामिल होने देने का निर्देश दिया। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक बहस को जन्म दिया। दलित संगठनों और प्रगतिशील समूहों ने मंत्रियों के साथ किए गए व्यवहार की आलोचना की। फिलहाल, घटना को लेकर सरकार की ओर से जांच के निर्देश दिए गए हैं।