
Congress candidate Nandigram: नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को गरमा दिया है। प्रधान ने रिहा होने के बाद बड़ा खुलासा किया है।
मिलन प्रधान ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें हिरासत में लेने के बाद आंखों पर पट्टी बांधकर मंदारमणि के एक होटल या रिजॉर्ट तक ले गई और वहां मिलन प्रधान से नामांकन वापस लेने के लिए कहा गया।
बता दें कि 18 सितंबर को चंडीपुर इलाके के एक गेस्ट हाउस से मिलन प्रधान को पुलिस हिरासत में लेने पहुंची थी। इस मामले में पुलिस ने बताया कि प्रधान के खिलाफ पुराने मामलों में गैर-जमानती वारंट लंबित थे।
कांग्रेस नेता के अनुसार, उन्होंने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया। मिलन प्रधान ने बताया कि पहले से ही उन पर चुनाव मैदान छोड़ने का दबाव था और गिरफ्तारी के बाद भी यही कोशिश की गई।
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि गिरफ्तारी ऐसे समय हुई, जब नंदीग्राम उपचुनाव की तैयारियां चल रही थीं और मिलन प्रधान कांग्रेस के उम्मीदवार थे।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। चुनाव आयोग के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि इस मामले को लेकर आयोग के पास उस समय कोई विशेष शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।
पुलिस ने कांग्रेस के आरोपों से अलग तस्वीर पेश की। पुलिस के मुताबिक, मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 से जुड़े मामलों में चार गैर-जमानती वारंट लंबित थे और इन्हीं के आधार पर उनकी गिरफ्तारी की गई। इन मामलों में हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, सबूत मिटाने, हथियारों के साथ दंगा और अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं।
प्रधान की गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इससे 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस के सामने चुनाव प्रचार को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया।
मामला इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा। 29 सितंबर को हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत दे दी, जिससे उन्हें उपचुनाव में हिस्सा लेने और प्रचार करने का रास्ता मिला। अदालत ने उन्हें तय शर्तों के साथ अंतरिम राहत दी है।