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‘अब तक का सबसे बड़ा सरेंडर’, कौन है देवूजी? जो भारत में बंदूक के दम पर लाना चाहता था ‘लाल क्रांति’

सेंट्रल माओवादी पार्टी के सेक्रेटरी देवूजी और माओवादी पोलित ब्यूरो के सदस्य मल्ला राजिरेड्डी ने तेलंगाना की स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) के सामने 18 माओवादियों के साथ सरेंडर किया। तेलंगाना पुलिस अधिकारियों की मानें तो यह अब तक का सबसे बड़ा सरेंडर है।

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Feb 22, 2026
देवूजी, सबसे बड़ा नक्सली नेता (फोटो- X)

भारत में लाल गलियारे के खात्मे का पन्ना तेजी से लिखा जा रहा है। सुरक्षाबल जल्द ही हथियारबंद नक्सलवाद को इतिहास की किताब में समेट देंगे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इसकी डेडलाइन मार्च 2026 तय की है। इसी कड़ी में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) प्रतिबंधित पार्टी के महासचिव देवूजी ने सरेंडर कर दिया है। देवूजी पर अलग-अलग राज्यों से कुल मिलाकर 1 करोड़ रुपये का इनाम है।

सेंट्रल माओवादी पार्टी के सेक्रेटरी देवूजी और माओवादी पोलित ब्यूरो के सदस्य मल्ला राजिरेड्डी ने तेलंगाना की स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) के सामने 18 माओवादियों के साथ सरेंडर किया। हालांकि, बसवराजू के बाद CPI(माओवादी) के महासचिव बनाए जाने पर संदेह की स्थिति थी।

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कौन है देवूजी?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना के जगतियाल निवासी देवूजी ने कोरुतला के गवर्नमेंट जूनियर कॉलेज में इंटरमीडिएट लेवल तक पढ़ाई की। किशोरावस्था में ही वह साल 1982 में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ा। इसी RSU से बसवराजू और वेणुगोपाल ऊर्फ सोनू निकले थे। जो बाद में चलकर बड़े माओवादी नेता बने। बसवराजू को सुरक्षाबलों ने बीते साल एनकाउंटर में मार गिराया, जबकि वेणुगोपाल ने अक्टूबर 2025 में महाराष्ट्र में सीएम देवेंद्र फडणवीस के सामने सरेंडर कर दिया।

1986 में तेलंगाना पार्टी सदस्य के रूप में शामिल

देवूजी को 1986 में तेलंगाना में पार्टी सदस्य के तौर पर माओवादी आंदोलन में शामिल किया गया। 1989 में उसे महाराष्ट्र के गढ़चिरौली डिवीजन में डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM) के तौर पर ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद उसे 1996 में दंडकारण्य स्पेशल ज़ोनल कमेटी (SZC) सदस्य के तौर पर प्रमोट किया गया, फिर 2001 में सेंट्रल कमेटी में जगल मिली। कहा जाता है कि 2019 में देवूजी को CPI (माओवादी) के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का इंचार्ज बनाया गया। वहीं, बसवराज की मौत के बाद उसे महासचिव बनाया गया।

252 सुरक्षाकर्मियों की हत्या का आरोपी

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पिछले दो दशकों में जितने भी हिंसक माओवादी वारदात को अंजाम दिया गया। उसमें देवूजी का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ाव रहा है। आरोप है कि देवूजी के कारण 252 सुरक्षाकर्मी और कम से कम छह आम लोग मारे गए।

PLGA बनाने में रही निर्णायक भूमिका

नक्सलियों के गुरिल्ला आर्मी (पीपल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी) बनाने में देवूजी की निर्णायक भूमिका रही। वह बसवराजू मुप्पला लक्ष्मण राव, उर्फ ​​गणपति जैसे लीडर्स के छत्रछाए में रहकर काम किया। सुरक्षा अधिकारियों ने उसके सरेंडर करने पर कहा कि वह पार्टी में नए लोगों को लाने में असफल रहा। साथ ही, हाल के समय में कई शीर्ष स्तर के नक्सली नेता मारे गए, जबकि कईयों का हिंसक क्रांति से मोहभंग हो गया। वेणुगोपाल और रूपेश जैसे नेताओं ने हिंसक रास्ता छोड़कर सरेंडर कर दिया।

सशस्त्र नक्सलवाद जल्द समाप्त होगा: विजय शर्मा

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, "सशस्त्र नक्सलवाद के समापन की दिशा में तेलंगाना से सूचना आ रही है कि बसव राजू को मार गिराए जाने के बाद नक्सली कमान संभालने वाले व्यक्ति देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष सरेंडर किया है। छत्तीसगढ़ में सक्रिय रहे मल्ला राजू रेड्डी उर्फ संग्राम ने भी सरेंडर किया है, यह बहुत हर्ष का विषय है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने जो 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद की समाप्ति की जो घोषणा की है, उसके लिए देशव्यापी काम चल रहा है… सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होगा।"

ऑपरेशन कगार की शुरुआत

जून 2025 में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अमित शाह ने ऑपरेशन कगार शुरू होने के बाद कहा था, ‘मैंने कहा था कि 31 मार्च, 2026 को यह देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। आज मैं दोहराना चाहूंगा कि जिस तरह से सुरक्षाबलों ने वीरता दिखाई है, हम इस लक्ष्य को हासिल करेंगे। देश जब नक्सलवाद से मुक्त होगा, वो क्षण आजादी के बाद सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक होगा।’

वो दिन दूर नहीं जब लाल आतंक का होगा खात्मा: PM मोदी

पीएम मोदी ने 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के मौके पर कहा था, 'मैं लाखों माताओं बहनों को अपने बच्चों के लिए रोते बिलखते नहीं छोड़ सकता था। इसलिए 2014 में जब आपने भाजपा को अवसर दिया तो भारत को माओवादी आतंक से मुक्ति दिलाने का संकल्प हमने लिया। आज इसके नतीजे देश देख रहा है। 11 साल पहले देश के 125 जिले माओवादी आतंक की चपेट में थे। अब सवा सौ जिलों में से सिर्फ 3 जिले बचे हैं, जहां माओवादी आतंक है। मैं देशवासियों को गारंटी देता हूं कि वो दिन दूर नहीं जब हमारा छत्तीसगढ़, हमारा हिंदुस्तान, हिंदुस्तान का कोना-कोना माओवादी आतंक से मुक्त हो जाएगा।'

नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या में कमी आई

दरअसल, केंद्र में साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के साथ ही नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन तेज कर दिए। साल 2013 में नक्सलियों का देश के 20 राज्यों के 182 जिलों में असर था। अप्रैल 2018 में यह घटकर 90, जुलाई 2021 में 70 और अप्रैल-2024 में 38 रह गई। अत्यधिक नक्सल प्रभावित इलाकों की संख्या भी 12 से घटकर 6 रह गई है। इनमें छत्तीसगढ़ के चार जिले (बीजापुर, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा), झारखंड का एक जिला (पश्चिमी सिंहभूम) और महाराष्ट्र का एक जिला (गढ़चिरौली) शामिल है।

एक-एक कर मारे गए टॉप नक्सली

सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार में एक-एक करके टॉप नक्सली मारे जा चुके हैं, जबकि कई नक्सलियों ने सरेंडर किया है। छत्तीसगढ़ के घने अभुजमाड़ जंगल में सुरक्षा बलों ने 21 मई 2025 को सीपीआई (महासचिव) नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू समेत 27 नक्सलियों को मौत के घात उतार दिया था। यह नक्सल विरोधी कार्रवाई के इतिहास में सबसे बड़ा ऑपरेशन था। बसवराजू पर 1.5 करोड़ रुपए का इनाम था। वह साल 2018 में मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति के बाद पार्टी का महासचिव बना था।

वहीं, सुरक्षाबलों ने 2025 में कई टॉप नक्सली नेताओं को मार गिराया। इनमें गौतम उर्फ सुधाकर (केंद्रीय समिति के सदस्य), भास्कर राव उर्फ मेलारापु एडेल्लू (तेलंगाना राज्य समिति के सदस्य), कट्टा रामचंद्र रेड्डी (केंद्रीय समिति के सदस्य), कडरी सत्यनारायण रेड्डी (केंद्रीय समिति के सदस्य) और मोडेम बालकृष्ण (केंद्रीय समिति के सदस्य), हिडमा (पोलित ब्यूरो सदस्य) शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल में 1967 के नक्सलबाड़ी से पैदा हुआ नक्सलवाद

नक्सल आंदोलन की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव में जमीनदारों के खिलाफ आदिवासी और भूमिहीन किसानों के एक विद्रोह से हुई थी। इस विद्रोह का नेतृत्व चारु मजूमदार और कानू सान्याल जैसे वामपंथी नेताओं ने किया, जो माओत्से तुंग की विचारधारा से प्रेरित थे। यह आंदोलन वर्ग संघर्ष और भूमि सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ था और जल्द ही इसने सशस्त्र संघर्ष का रूप ले लिया, जो पूरे भारत में फैल गया।

चारु मजूमदार जैसे नेताओं का मानना था कि हिंसक क्रांति के माध्यम से ही राज्य को उखाड़ फेंका जा सकता है। इसके कारण उन्होंने 1969 में माओवादी विचारधारा पर आधारित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) का गठन किया था। 2004 में दो प्रमुख नक्सली समूहों, माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) और पीपुल्स वार का विलय हो गया। जो बाद में CPI (माओवादी) नामक पार्टी बनी।

Updated on:
22 Feb 2026 05:06 pm
Published on:
22 Feb 2026 04:57 pm
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